नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब दुनिया भर के खाद्य बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। युद्ध के कारण होरमुज क्षेत्र में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है जिससे वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में तेजी आई है। इसका सीधा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी पड़ा है और आम लोगों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि अप्रैल 2026 में एफएओ फूड प्राइस इंडेक्स बढ़कर 130.7 अंक पर पहुंच गया। यह मार्च 2026 की तुलना में 1.6 प्रतिशत अधिक है।
एफएओ के अनुसार यह सूचकांक खाद्यान्न, चावल, खाने के तेल, मांस, डेयरी उत्पाद और चीनी की कीमतों को मिलाकर तैयार किया जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च के मुकाबले अप्रैल में इन अधिकांश वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हुई जिसके कारण कुल फूड प्राइस इंडेक्स में भी उछाल आया।
रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल महीने में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी वेजिटेबल ऑयल यानी खाद्य तेल की कीमतों में दर्ज की गई। मार्च की तुलना में अप्रैल में इसकी कीमत 5.9 प्रतिशत तक बढ़ गई। लगातार बढ़ती मांग और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों के कारण खाद्य तेल की कीमत जुलाई 2022 के बाद फिर अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर आने वाले समय में खाद्य महंगाई को और बढ़ा सकता है। इससे दुनिया के कई देशों में आम लोगों के खर्च और घरेलू बजट पर दबाव बढ़ने की आशंका है।