मुंबई : भारत के शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी लगातार घटती जा रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि विदेशी निवेश अब 14 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FII) की हिस्सेदारी घटकर 14.7 प्रतिशत रह गई है। जून 2012 के बाद यह सबसे कम स्तर माना जा रहा है। इससे पहले अप्रैल 2016 में विदेशी निवेश की हिस्सेदारी 19.9 प्रतिशत थी। यह जानकारी जेएम फाइनेंशियल फंडामेंटल रिसर्च की रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक साल 2026 की शुरुआत से ही विदेशी निवेशक लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। अप्रैल महीने में भी यह सिलसिला जारी रहा। विदेशी निवेश में लगातार गिरावट का असर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है और इससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को काफी हद तक संभालने का काम किया है। पिछले एक साल में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 18.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि म्यूचुअल फंड के सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए लगातार आने वाला निवेश इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है।
निफ्टी-50 इंडेक्स में शामिल कंपनियों के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों ने 41 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है लेकिन इनमें से 39 कंपनियों में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने निवेश बढ़ाया है। इससे साफ है कि भारतीय निवेशकों का भरोसा अभी भी बाजार में बना हुआ है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मार्च महीने में विदेशी निवेश की सबसे ज्यादा निकासी देखने को मिली। इसका सबसे अधिक असर बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विस और इंश्योरेंस सेक्टर पर पड़ा है। इन क्षेत्रों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव बढ़ा।