पश्चिम बंगाल में भाजपा को बहुमत के साथ जीत दिलाने में एक बड़ी भूमिका शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने निभायी है। उनके शामिल होने के बाद से ही कहा जा सकता है कि बंगाल में भाजपा का सूर्य उदित हुआ। विधानसभा चुनाव 2021 में शुभेंदु अधिकारी ने जहां तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी को अपने गढ़ नंदीग्राम में हराया था।
वहीं इस बार के विधानसभा चुनाव में दो सीटों से उन्होंने चुनाव लड़ा, नंदीग्राम और भवानीपुर। भवानीपुर सीट से एक बार फिर से तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनके सामने थी। इस बार भी नंदीग्राम के साथ-साथ उन्होंने भवानीपुर सीट से भी जीत हासिल की।
शुक्रवार को बतौर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नाम की घोषणा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तो यहां तक कह दिया कि शुभेंदु दा ने तो दीदी (ममता बनर्जी) को उनके गढ़ में ही हराया।
बंगाल के भावी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का परिवार हमेशा से ही राजनीति से जुड़ा हुआ रहा है। पूर्व मिदनापुर जिले को इस परिवार का गढ़ माना जाता है जहां से उनके पिता शिशिर अधिकारी विधानसभा और लोकसभा दोनों चुनावों में जीत हासिल की थी। उनकी तरह ही उनके भाई दिव्येंदु अधिकारी शुरुआत में तृणमूल से जुड़े थे लेकिन साल 2024 में वह भी भाजपा में शामिल हो गए।
वहीं बात अगर शुभेंदु अधिकारी की करें तो वह तृणमूल के साथ शुरुआत से ही जुड़े हुए थे। एक प्रकार से कहा जा सकता है कि उनके तृणमूल छोड़ने और भाजपा में शामिल होने की वजह से राज्य की राजनीति में काफी उथल-पुथल भी मची थी।
चलिए अब आते हैं उनके व्यक्तिगत जीवन पर। पिछले काफी समय पर गूगल (Google) पर बड़ी संख्या में लोगों ने शुभेंदु अधिकारी की पत्नी के बारे में सर्च किया है। आखिर कौन और कहां हैं बंगाल के भावी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की पत्नी? क्यों उनके बारे में अब तक कोई चर्चा नहीं हुई?
कौन और कहां हैं शुभेंदु अधिकारी की पत्नी?
साल 2021 में एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू के हवाले से Wionews की मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि शुभेंदु अधिकारी ने शादी नहीं की है। अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में बताते हुए शुभेंदु अधिकारी ने बताया था, "मैं अविवाहित हूं और इसकी सबसे अच्छी बात है कि मेरे पास काम करने का ढेर सारा समय होता है। वह भी बिना किसी दोषारोप या शिकायत के।"
उन्होंने अपने इस फैसले को स्वतंत्रता संग्रामी सतीश सामंत, सुशील धर और अजय मुखोपाध्याय से जोड़कर बताया। उन्होंने इस इंटरव्यू के दौरान कहा था कि ये तीनों ही अविवाहित थे और मैंने भी इनके रास्ते पर ही चलने का निर्णय लेते हुए अविवाहित रहने का फैसला लिया।
उन्होंने कहा था कि किसी परिवार के सदस्य को राजनीति में स्थापित करने की कोशिश करना, अपनी राजनीतिक इच्छाओं को दूसरों के माध्यम से पूरा करना या किसी और के लिए राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग करना - यह सब इसके नुकसान हैं। इसीलिए मुझे लगता है कि मैं सही काम कर रहा हूं।