कोलकाताः पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के साथ ही राज्य के अगले मुख्य सचिव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मौजूदा मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल (Manoj Kumar Agarwal) का नाम अब सबसे मजबूत दावेदारों में गिना जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि हालिया विधानसभा चुनाव को अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के बाद उनकी दावेदारी और मजबूत हुई है।
1990 बैच के आईएएस (IAS) अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी हैं और आईआईटी कानपुर से पढ़ाई कर चुके हैं। लंबे प्रशासनिक अनुभव और वरिष्ठता के कारण उन्हें राज्य के सबसे अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता है। सूत्रों के मुताबिक नई भाजपा सरकार उन्हें राज्य के शीर्ष प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी सौंप सकती है।
हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्य चुनाव अधिकारी के रूप में उनकी भूमिका काफी चर्चा में रही। चुनावी हिंसा और रक्तपात के आरोपों से अक्सर घिरे रहने वाले पश्चिम बंगाल में इस बार अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण मतदान को उनकी प्रशासनिक सफलता माना जा रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि उन्होंने राज्य की चुनावी संस्कृति को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) ने भी उनके कामकाज की सराहना की है। इसी वजह से अब उनका नाम मुख्य सचिव पद की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
हालांकि नियमों के अनुसार मनोज कुमार अग्रवाल का कार्यकाल जुलाई में समाप्त होने वाला है। ऐसे में यदि उन्हें मुख्य सचिव बनाया जाता है, तो केंद्र सरकार से सेवा विस्तार की मंजूरी लेनी पड़ सकती है। प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि नई सरकार इस दिशा में पहल कर सकती है।
इस बीच गुरुवार को राज्य के मौजूदा मुख्य सचिव दुष्यंत नरियाला (Dushyant Nariala) ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय जाकर मनोज कुमार अग्रवाल से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद प्रशासनिक गलियारों में अटकलें और तेज हो गईं।
सूत्रों के अनुसार, पिछली बार मुख्य सचिव पद के लिए चयन न होने से मनोज कुमार अग्रवाल ने अपने करीबी लोगों के बीच नाराजगी भी जाहिर की थी। बाद में उन्हें राज्य का मुख्य निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया था और उनका नाम चुनाव आयोग को भेजा गया था।
पश्चिम बंगाल प्रशासन में मनोज कुमार अग्रवाल का लंबा अनुभव रहा है। वर्ष 2001 में उन्हें पहली बार राज्य में अहम जिम्मेदारी मिली थी, जब वे बर्धमान के जिलाधिकारी बनाए गए। इसके बाद उन्होंने राज्य हाईवे कॉरपोरेशन के चेयरमैन, प्रशासनिक सुधार एवं कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव, खाद्य विभाग के प्रधान सचिव, अग्निशमन एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।
उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रिय रंजन दासमुंशी (Priya Ranjan Dasmunsi) के निजी सचिव के रूप में भी लंबे समय तक जिम्मेदारी संभाली थी। अब नई सरकार के गठन के बीच उनका नाम फिर से राज्य के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद के लिए चर्चा के केंद्र में आ गया है।