कोलकाताः कोलकाता का ब्रिगेड परेड ग्राउंड केवल एक खुला मैदान नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति की सबसे बड़ी पहचान माना जाता रहा है। दशकों से यह मैदान सत्ता, विचारधारा और जनसमर्थन की ताकत मापने का केंद्र रहा है। जिस दल ने यहां सबसे बड़ी भीड़ जुटाई, उसे बंगाल की राजनीति का सबसे मजबूत खिलाड़ी माना गया।
ब्रिटिश दौर में सैन्य परेड के लिए इस्तेमाल होने वाला यह मैदान बाद में राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का सबसे बड़ा मंच बन गया। यही वजह है कि बंगाल की राजनीति में ब्रिगेड का महत्व केवल एक रैली स्थल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक वैधता और जनस्वीकृति का प्रतीक बन गया।
लाल झंडों की राजनीति का सबसे मजबूत गढ़
सत्तर के दशक के बाद ब्रिगेड ग्राउंड पूरी तरह वामपंथी राजनीति की पहचान बन गया। ज्योति बसु (Jyoti Basu) और वाम मोर्चे के दूसरे नेताओं की विशाल रैलियों में यहां लाल झंडों का समंदर दिखाई देता था। लगातार 34 वर्षों तक सत्ता में रहने वाले वाम मोर्चे ने ब्रिगेड को अपने राजनीतिक प्रभुत्व के प्रतीक में बदल दिया था।
इंदिरा गांधी और शेख मुजीबुर्रहमान ने भी इसी मैदान से ऐतिहासिक सभा को संबोधित किया। 1984 में एन. टी. रामाराव, फारूक अब्दुल्ला और ज्योति बसु जैसे नेताओं ने कांग्रेस विरोधी सम्मेलन किया था। ब्रिगेड धीरे-धीरे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति का भी बड़ा मंच बन गया।
लाल सलाम से भगवा रंग में रंगने को तैयार ब्रिगेड पीटीआई ममता की हुंकार से BJP के शक्ति प्रदर्शन तक
समय के साथ बंगाल की राजनीति बदली और ब्रिगेड का रंग भी बदलने लगा। वाम मोर्चा के कमजोर पड़ने के बाद ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने इसी मैदान को अपने राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बनाया। 2019 में उन्होंने देशभर के विपक्षी नेताओं को साथ लाकर भाजपा के खिलाफ बड़ी रैली की थी। उस समय ब्रिगेड को विपक्षी एकता के सबसे बड़े मंच के रूप में देखा गया।
लेकिन अब वही मैदान एक नए राजनीतिक बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। भाजपा, जिसे कभी बंगाल में सीमित राजनीतिक ताकत माना जाता था, अब उसी ब्रिगेड ग्राउंड में अपनी पहली सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीतिक धुरी बदलने का प्रतीक भी है।
‘नए बंगाल’ के संदेश के साथ तैयार हो रहा ब्रिगेड
शनिवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के लिए ब्रिगेड ग्राउंड को बड़े स्तर पर सजाया जा रहा है। भाजपा नेताओं के मुताबिक करीब एक लाख लोगों के आने की संभावना है। बारिश की आशंका को देखते हुए विशाल वाटरप्रूफ टेंट लगाए जा रहे हैं। वीवीआईपी मेहमानों, सांसदों, विधायकों और पार्टी नेताओं के लिए अलग-अलग सेक्टर बनाए गए हैं।
समारोह को बंगाली सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने की भी कोशिश हो रही है। मैदान में टेराकोटा कला, दक्षिणेश्वर मंदिर की झलक और सुंदरबन थीम की सजावट की जा रही है। छऊ, बाउल और गंभीरा जैसे लोकनृत्यों के आयोजन की भी तैयारी है। साथ ही झालमुड़ी, रसगुल्ला और संदेश जैसे बंगाली व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे।
करीब चार हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती के बीच ब्रिगेड ग्राउंड एक बार फिर बंगाल की राजनीति के नए अध्याय का गवाह बनने को तैयार है। बदलती सरकारों, विचारधाराओं और नारों के बीच ब्रिगेड ने हर दौर को देखा है, लेकिन इस बार यहां होने वाला शपथ ग्रहण बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।