कोलकाताः सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों को भीड़ द्वारा बंधक बनाए जाने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency -NIA) को निर्देश दिया है कि वह इस पूरे प्रकरण की जांच दो महीने के भीतर पूरी करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच समाप्त होने के बाद NIA को संबंधित सक्षम अदालत में अपनी रिपोर्ट और चार्जशीट दाखिल करनी होगी और कानून अपने अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा।
यह मामला 1 अप्रैल को पश्चिम बंगाल के मालदा में हुई उस घटना से जुड़ा है, जब एक भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों को घेरकर लगभग नौ घंटे तक बंधक बनाए रखा था। इनमें तीन महिला अधिकारी और एक पांच वर्षीय बच्चा भी शामिल था। इस दौरान उन्हें भोजन और पानी तक उपलब्ध नहीं कराया गया था, जिससे स्थिति गंभीर हो गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Surya Kant) और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची (Joymalya Bagchi) शामिल थे। उन्होंने सुनवाई के दौरान NIA से जांच की प्रगति पर सवाल किया और पूछा कि जांच कहां तक पहुंची है और क्या इसे पूरा कर लिया गया है। NIA की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू (S V Raju) ने अदालत को बताया कि एजेंसी जल्द ही विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेगी। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि जांच को प्राथमिकता देते हुए इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए और संभव हो तो दो महीने के भीतर निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद NIA को चार्जशीट दाखिल करनी होगी और उसके बाद कानून अपना काम करेगा। इससे पहले 24 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने NIA को जांच पूरी होने पर चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति दी थी। यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें करीब 60 लाख आपत्तियों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड से लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की गई थी। इसी दौरान मालदा में न्यायिक अधिकारियों को भीड़ द्वारा घेरने की घटना सामने आई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू की थी। यह कदम कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) के मुख्य न्यायाधीश द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर उठाया गया था, जिसमें 1 अप्रैल की रात की घटना का विस्तृत विवरण दिया गया था।
कोर्ट ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान न्यायिक अधिकारियों को दी गई सुरक्षा विधानसभा चुनाव समाप्त होने तक जारी रहेगी और बिना उसकी अनुमति इसे वापस नहीं लिया जा सकता। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा था कि NIA द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों का कोई राजनीतिक संबंध है या नहीं और कहा था कि इस मामले को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना जरूरी है।