कोलकाता : इंडियन प्रीमियर लीग के मौजूदा सीजन में प्ले-ऑफ की दौड़ बेहद रोमांचक हो गई है। इस बीच मुंबई इंडियंस और लखनऊ सुपर जायंट्स के बाहर होने के बाद स्थिति और साफ हो गई है कि अब केवल आठ टीमें ही चार प्ले-ऑफ स्थानों के लिए मुकाबले में बची हैं। वहीं कोलकाता नाइट राइडर्स फिलहाल नीचे के हिस्से में बनी हुई है लेकिन उसके पास अभी भी चार मैच बचे हैं और उसके सामने अब प्ले-ऑफ में पहुंचने की चुनौती बनी हुई है।
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 11 मैचों में 14 अंकों के साथ अंक तालिका में शीर्ष पर है। एक और जीत के साथ वह 16 अंकों तक पहुंच जाएगी जिसे सामान्यतः प्ले-ऑफ के लिए पर्याप्त माना जाता है। हालांकि टीम का लक्ष्य बाकी सभी मैच जीतकर शीर्ष दो में अपनी जगह पक्की करना है।
सनराइजर्स हैदराबाद और गुजरात टाइटन्स
सनराइजर्स हैदराबाद और गुजरात टाइटन्स दोनों ही 11 मैचों में 14 अंकों पर हैं। नेट रन रेट के मामले में सनराइजर्स हैदराबाद (+0.737) ने गुजरात टाइटन्स (+0.228) को पीछे छोड़ दिया है। दोनों टीमों को अंतिम तीन मैचों में कम से कम दो मुकाबले जीतने होंगे। 12 मई को दोनों टीमों के बीच होने वाला मुकाबला प्ले-ऑफ की रेस में बेहद अहम साबित होगा।
पंजाब किंग्स
पंजाब किंग्स 10 मैचों में 13 अंकों के साथ सबसे मजबूत स्थिति में मानी जा रही है। टीम के पास एक अतिरिक्त मैच भी है। अंतिम चार में से दो मैच जीतकर वह 17 अंकों तक पहुंच सकती है जिससे उसका प्ले-ऑफ में स्थान लगभग तय माना जा रहा है।
चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स
चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स दोनों ही 11 मैचों में 12 अंकों पर हैं। नेट रन रेट में चेन्नई सुपर किंग्स आगे है। प्ले-ऑफ की दौड़ में बने रहने के लिए दोनों टीमों को अपने बचे हुए तीन मैचों में कम से कम दो जीत दर्ज करनी होगी। राजस्थान रॉयल्स को नेट रन रेट में पिछड़ने के कारण सभी तीन मैच जीतने का लक्ष्य रखना होगा।
कोलकाता नाइट राइडर्स
कोलकाता नाइट राइडर्स 10 मैचों में 9 अंकों के साथ सातवें स्थान पर है। टीम के लिए राह बेहद कठिन हो गई है। उसे अपने बचे हुए चारों मैच जीतने होंगे तभी वह 17 अंकों तक पहुंच सकेगी। यदि एक भी मैच हारती है तो अधिकतम 15 अंकों तक ही पहुंच पाएगी, ऐसे में उसे अन्य टीमों के परिणामों पर निर्भर रहना होगा।
दिल्ली कैपिटल्स
दिल्ली कैपिटल्स की स्थिति लगभग समाप्त मानी जा रही है। टीम के पास 8 अंक हैं और अधिकतम 14 अंक तक ही पहुंच सकती है। साथ ही टीम का नेट रन रेट (-1.154) सबसे खराब है। ऐसे में उसे बड़े अंतर से सभी मैच जीतने होंगे और बाकी टीमों के परिणामों पर निर्भर रहना होगा, लेकिन प्ले-ऑफ की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।
इस तरह प्ले-ऑफ की रेस अब पूरी तरह से गणित और प्रदर्शन पर टिकी हुई है जहां हर मैच का नतीजा टेबल की तस्वीर बदल सकता है।