लंदन : ब्रिटेन और चीन के बीच तनाव उस समय बढ़ गया जब लंदन की एक अदालत ने चीन के लिए जासूसी करने के आरोप में दो लोगों को दोषी ठहराया। इसके बाद ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने चीन के राजदूत झेंग ज़ेगुआंग को तलब कर कड़ी आपत्ति जताई।
ब्रिटिश विदेश मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि 8 मई को चीन के राजदूत को विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय में बुलाया गया। वहां अधिकारियों ने साफ कहा कि ब्रिटेन में किसी भी विदेशी सरकार द्वारा लोगों या समुदायों को डराने, परेशान करने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ब्रिटेन ने इसे अपनी संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन बताया और कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
यह कार्रवाई लंदन की सेंट्रल क्रिमिनल कोर्ट के फैसले के एक दिन बाद हुई। अदालत ने वाई ची-लुंग और युएन चुंग-बियू को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 2023 के तहत विदेशी खुफिया एजेंसी की मदद करने का दोषी पाया। दोनों पर चीन समर्थित जासूसी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था।
वाई ची-लुंग पहले ब्रिटिश इमिग्रेशन अधिकारी रह चुका है। अदालत ने उसे सरकारी पद के दुरुपयोग का भी दोषी माना। अभियोजन पक्ष के अनुसार उसने हीथ्रो एयरपोर्ट पर ब्रिटिश बॉर्डर फोर्स में तैनाती के दौरान सरकारी डेटाबेस का गलत तरीके से इस्तेमाल किया और निजी जानकारी अवैध रूप से साझा की। आरोप है कि उसने ड्यूटी के बाहर भी बिना अनुमति कई खोजें की थीं।
जांच का नेतृत्व करने वाली अधिकारी हेलेन फ्लैनगन ने दोनों की गतिविधियों को “खतरनाक और डर पैदा करने वाली” बताया। उन्होंने कहा कि जांच में ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि दोनों आरोपी हांगकांग प्रशासन के लिए काम कर रहे थे और ब्रिटेन में रह रहे लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं पर नजर रख रहे थे।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों आरोपी चीनी और ब्रिटिश नागरिकता रखते हैं और बीजिंग के लिए जासूसी के मामले में दोषी ठहराए जाने वाले ब्रिटेन के पहले लोग माने जा रहे हैं। दोष सिद्ध होने पर उन्हें 14 साल तक की जेल हो सकती है।
दूसरी ओर ब्रिटेन स्थित चीनी दूतावास ने पुष्टि की कि राजदूत झेंग ज़ेगुआंग ने ब्रिटिश विदेश कार्यालय के प्रतिनिधि से मुलाकात की। चीन की ओर से जारी बयान में अदालत के फैसले का विरोध किया गया और ब्रिटेन से “चीन विरोधी राजनीतिक गतिविधियां” बंद करने की मांग की गई।
इस मामले के बाद हांगकांग आर्थिक और व्यापार कार्यालय फिर विवादों में आ गया है। यह कार्यालय मूल रूप से ब्रिटेन और हांगकांग के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत करने के लिए बनाया गया था, लेकिन आलोचकों का आरोप है कि इसकी सुविधाओं और संसाधनों का इस्तेमाल विदेशों में रह रहे हांगकांग कार्यकर्ताओं की निगरानी और खुफिया गतिविधियों के लिए किया जाता रहा है।