मुंबईः आशंकाओं को सच साबित करते हुए सप्ताह की शुरुआत में देश के शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। पिछले कारोबारी सत्र के बंद स्तर की तुलना में दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक काफी कम स्तर पर खुले। इसके बाद Sensex और Nifty 50 दोनों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली।
बाजार खुलते ही कई महत्वपूर्ण सेक्टरों में दबाव साफ नजर आया और लगातार बिकवाली का माहौल बना रहा। रियल्टी, ऑटो, एनर्जी और बैंकिंग जैसे प्रमुख सेक्टर शुरुआती कारोबार से ही कमजोरी में रहे। इस तेज गिरावट के कारण निवेशकों को सप्ताह की शुरुआत में ही बड़े नुकसान का सामना करना पड़ा है, जिससे बाजार में सतर्कता और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
सोमवार को Sensex पिछले बंद स्तर की तुलना में लगभग 1042 अंक यानी 1.33 प्रतिशत गिर गया। इसके चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का यह प्रमुख सूचकांक 76,285 अंक पर आ गया। वहीं Nifty 50 में भी लगभग 309 अंक यानी 1.28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके परिणामस्वरूप नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का यह बेंचमार्क सूचकांक 23,866 अंक के स्तर पर बंद हुआ।
दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों के साथ-साथ देश के दोनों स्टॉक एक्सचेंजों में सोमवार सुबह से ही सभी सेक्टोरल इंडेक्स में गिरावट देखने को मिली। इनमें पर्यटन, रियल्टी, मीडिया, पीएसयू बैंक, ऑटो, एनर्जी तथा ऑयल एंड गैस जैसे सेक्टरों में सबसे अधिक दबाव रहा और इनके सूचकांक में तेज गिरावट दर्ज की गई।
इसके मुकाबले आईटी, एफएमसीजी और फार्मा सेक्टर में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही, हालांकि वे भी नकारात्मक दायरे में ही कारोबार करते नजर आए।
क्यों हफ्ते की शुरुआत में शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई?
सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार में बिकवाली का दबाव एक साथ कई वैश्विक और घरेलू कारणों से बना। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में सबसे बड़ी चिंता पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है, जिसका सीधा असर वैश्विक निवेश धारणा पर पड़ रहा है।
1. पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान-अमेरिका वार्ता की अनिश्चितता
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिल रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता और बातचीत में प्रगति न होने से स्थिति और संवेदनशील हो गई है। इस तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ा है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
भू-राजनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है, क्योंकि इससे आयात बिल बढ़ता है, महंगाई का दबाव बढ़ता है और आर्थिक संतुलन पर असर पड़ता है। यही कारण है कि तेल की कीमतों में उछाल बाजार के लिए नकारात्मक माना जाता है।
3. रुपये में कमजोरी
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट भी बाजार की कमजोरी का एक बड़ा कारण रही। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के रिटर्न को प्रभावित करता है और आयात महंगा कर देता है। इन दोनों कारणों से बाजार में नकारात्मक माहौल बनता है और बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है।
4. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय शेयरों की बिकवाली कर रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर विदेशी निवेशक आमतौर पर उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर जाते हैं। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा और लिक्विडिटी कम हो गई।
5. ऊर्जा खपत और बचत को लेकर संदेश
रविवार को प्रधानमंत्री द्वारा ऊर्जा खपत कम करने और पेट्रोल-डीजल की बचत की अपील ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। आवश्यक होने पर वर्क फ्रॉम होम अपनाने और अनावश्यक आयातित ईंधन की खपत कम करने की बात कही गई। साथ ही सोने की खरीद पर भी संयम बरतने की सलाह दी गई। इन बयानों के बाद ज्वैलरी, ट्रैवल और संबंधित सेक्टरों में दबाव बढ़ा।
6. India VIX में बढ़ोतरी
India VIX यानी बाजार का “डर सूचकांक” बढ़ने से यह संकेत मिला कि निवेशक आने वाले समय में तेज उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं। आमतौर पर VIX बढ़ने का मतलब होता है कि बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है, जिससे निवेशक सुरक्षित रहने के लिए शेयरों की बिकवाली करते हैं।
7. बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर दबाव
बाजार में बैंकिंग और वित्तीय सेक्टर का वेटेज सबसे ज्यादा होता है। इसलिए इस सेक्टर में जब भी बिकवाली होती है, उसका असर सीधे पूरे बाजार पर पड़ता है। सोमवार को भी इस सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों पर अतिरिक्त दबाव बना।
कुल मिलाकर, बाजार में आई यह गिरावट किसी एक कारण का परिणाम नहीं है, बल्कि वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, रुपये की कमजोरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बाजार की बढ़ती अस्थिरता जैसे कई कारकों का संयुक्त असर है। यही वजह है कि सप्ताह की शुरुआत शेयर बाजार के लिए कमजोर साबित हुई।
(समाचार एई समय किसी भी प्रकार का निवेश करने की सलाह नहीं देता है। शेयर बाजार या किसी भी क्षेत्र में निवेश जोखिम के अधीन है। निवेश से पहले उचित अध्ययन और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। यह खबर केवल शैक्षिक और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।)