नई दिल्ली : आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने का समय आते ही कई करदाता जल्द से जल्द रिटर्न भरकर जिम्मेदारी पूरी करना चाहते हैं लेकिन कर विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में जल्दबाजी नुकसानदायक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि 2025-26 वित्त वर्ष यानी असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 15 जून से पहले आईटीआर दाखिल करने से बचना बेहतर होगा।
हालांकि आयकर विभाग का ई-फाइलिंग पोर्टल आमतौर पर 1 अप्रैल से खुल जाता है लेकिन वास्तव में रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया मई के मध्य से पूरी तरह सक्रिय होती है। इसकी वजह यह है कि बैंक, नियोक्ता कंपनियां और अन्य वित्तीय संस्थान अपने डेटा और विभिन्न फॉर्म अपडेट करने में समय लेते हैं।
कर विशेषज्ञ और ईवाई (EY) में टैक्स विभाग के पूर्व सीनियर मैनेजर निशांत शंकर के अनुसार 31 मई तक बैंक, कंपनियां और वित्तीय संस्थान कई महत्वपूर्ण जानकारियां अपलोड करते हैं लेकिन इन सूचनाओं को फॉर्म 26AS, AIS और TIS में पूरी तरह दिखाई देने में एक से दो सप्ताह अतिरिक्त लग सकते हैं।
उन्होंने बताया कि कई बार कंपनियां और बैंक बाद में संशोधित टीडीएस रिटर्न जमा करते हैं। इसी तरह ब्याज आय, शेयर और म्यूचुअल फंड लेनदेन से जुड़ी जानकारियां भी बाद में अपडेट होती हैं। ऐसे में बहुत जल्दी आईटीआर दाखिल करने पर आय का कुछ हिस्सा छूट सकता है या टीडीएस क्रेडिट में गलती हो सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक जल्दबाजी में रिटर्न दाखिल करने से कई समस्याएं सामने आ सकती हैं। फॉर्म 26AS में सभी टीडीएस एंट्री नहीं दिख सकतीं। AIS में ब्याज और डिविडेंड की जानकारी अधूरी रह सकती है। उच्च मूल्य के लेनदेन से जुड़ी SFT जानकारी भी अपडेट नहीं हो सकती। इससे गलत टीडीएस क्रेडिट क्लेम होने, आय कम दिखने या जानकारी में गड़बड़ी की आशंका बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में आयकर विभाग की ओर से नोटिस भी आ सकता है। साथ ही रिफंड मिलने में देरी हो सकती है या बाद में संशोधित रिटर्न दाखिल करना पड़ सकता है।
निशांत शंकर का कहना है कि जिन लोगों के पास कैपिटल गेन, कई बैंक खाते, विदेशी संपत्ति, व्यवसायिक आय या बड़े वित्तीय लेनदेन हैं, उन्हें सभी आंकड़ों का अच्छी तरह मिलान करने के बाद ही आईटीआर दाखिल करना चाहिए।
आमतौर पर जून के मध्य तक फॉर्म 26AS, AIS, TIS, SFT, बैंक ब्याज, डिविडेंड आय, म्यूचुअल फंड और शेयर लेनदेन से जुड़ी जानकारियां पूरी तरह अपडेट हो जाती हैं। संशोधित टीडीएस रिटर्न भी तब तक सिस्टम में दिखाई देने लगते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर आईटीआर दाखिल करना अच्छी आदत है लेकिन गलत या अधूरी जानकारी के साथ रिटर्न भरना भविष्य में परेशानी बढ़ा सकता है। इसलिए 15 जून के बाद सभी जरूरी दस्तावेज और आंकड़ों का मिलान कर ही आयकर रिटर्न दाखिल करना अधिक सुरक्षित माना जा रहा है।