नई दिल्लीः देश की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि 1 जुलाई से “विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम” यानी VB-G RAM G कानून पूरे देश में लागू किया जाएगा। इसके साथ ही करीब 20 साल पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को समाप्त कर दिया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इसे भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में “ऐतिहासिक बदलाव” बताया है। सरकार का कहना है कि नया कानून सिर्फ रोजगार देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांवों में उत्पादकता बढ़ाने, बुनियादी ढांचा मजबूत करने और ग्रामीण आय बढ़ाने पर भी फोकस करेगा।
मनरेगा की जगह क्या बदलेगा?
VB-G RAM G कानून के तहत हर ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक होंगे, उन्हें एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी।
मौजूदा मनरेगा कानून में यह सीमा 100 दिनों की थी। यानी नए कानून में ग्रामीण परिवारों को 25 दिन अतिरिक्त रोजगार मिलेगा। सरकार का कहना है कि यह नया मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों को “भविष्य के लिए तैयार” बनाने की दिशा में काम करेगा।
रोजगार नहीं मिला तो मिलेगा भत्ता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया, तो श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। यह प्रावधान पुराने मनरेगा कानून की तरह नए ढांचे में भी जारी रहेगा, ताकि मजदूरों की आय सुरक्षा बनी रहे। नए कानून में मजदूरी भुगतान को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया गया है।
मजदूरी सीधे श्रमिकों के बैंक या डाकघर खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए भेजी जाएगी। सरकार ने कहा है कि भुगतान साप्ताहिक आधार पर या अधिकतम 15 दिनों के भीतर करना होगा। यदि भुगतान में देरी होती है, तो श्रमिकों को मुआवजा भी दिया जाएगा।
मनरेगा से नए कानून में कैसे होगा बदलाव?
केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि मनरेगा से नए कानून में बदलाव पूरी तरह सहज होगा और किसी भी श्रमिक का काम प्रभावित नहीं होगा। 30 जून तक मनरेगा के तहत चल रहे सभी काम नए ढांचे में स्वतः स्थानांतरित कर दिए जाएंगे। मौजूदा e-KYC सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड तब तक वैध रहेंगे, जब तक नए “ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड” जारी नहीं हो जाते। सरकार ने यह भी साफ किया है कि जिन श्रमिकों की e-KYC प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, उन्हें भी रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा।
ग्राम पंचायत स्तर पर जारी रहेगा पंजीकरण
जिन लोगों के पास फिलहाल जॉब कार्ड नहीं हैं, वे ग्राम पंचायत स्तर पर पंजीकरण करवा सकेंगे। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र ग्रामीण परिवार को रोजगार से बाहर न रखा जाए। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार मजदूरी भुगतान, शिकायत निवारण, प्रशासनिक खर्च और फंड आवंटन से जुड़े नियमों का मसौदा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ चर्चा के बाद जल्द सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया जाएगा।
अब तक का सबसे बड़ा बजट आवंटन
सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के तहत 95,692.31 करोड़ रुपये का बजट अनुमान रखा गया है। इसे देश के किसी भी ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए अब तक का सबसे बड़ा आवंटन बताया गया है। राज्यों के योगदान को जोड़ने के बाद इस योजना का कुल आकार 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता है।
सरकार का फोकस क्या है?
केंद्र सरकार का कहना है कि नया कानून ग्रामीण भारत को सिर्फ मजदूरी आधारित अर्थव्यवस्था से आगे ले जाकर उत्पादक और आत्मनिर्भर ग्रामीण ढांचे में बदलने की दिशा में काम करेगा। सरकार इसे “विकसित भारत @2047” विजन का अहम हिस्सा मान रही है।