नई दिल्ली : देशभर में बिना डॉक्टर की सलाह के बिक रही यौन शक्ति बढ़ाने वाली दवाओं पर अब केंद्र सरकार सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने सभी राज्यों के ड्रग कंट्रोलरों को इस संबंध में विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि सिलडेनाफिल, टाडालफिल और डापोक्सेटिन जैसी दवाओं का अवैध कारोबार तेजी से बढ़ रहा है जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार आज के प्रतिस्पर्धी माहौल और कामकाजी तनाव के कारण कई लोग आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग बिना चिकित्सकीय सलाह के यौन उत्तेजक दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये दवाएं आसानी से मेडिकल दुकानों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो जाती हैं।
सरकार का मानना है कि इस स्थिति का फायदा उठाकर नकली और अवैध दवाओं का कारोबार फैल रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाओं का सेवन करने से अचानक रक्तचाप गिर सकता है और हृदय रोग का खतरा भी बढ़ सकता है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक केंद्र सरकार केवल स्वास्थ्य जोखिम को ही नहीं बल्कि इससे पैदा हो रही सामाजिक समस्याओं को लेकर भी चिंतित है। खासकर युवाओं में इन दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को गंभीर माना जा रहा है। भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपचाड़े ने इस मुद्दे को सरकार के सामने उठाया था। उनका कहना है कि प्रदर्शन को लेकर चिंता और आत्मविश्वास बढ़ाने की चाह में युवा वर्ग इन दवाओं का आदी बनता जा रहा है।
इसके बाद ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने चार प्रमुख निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अवैध क्लीनिक, बिना लाइसेंस वाली फार्मेसी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नियमित छापेमारी की जाएगी। नकली और अवैध दवाओं की बिक्री रोकने के लिए जरूरत पड़ने पर नए कानून भी बनाए जाएंगे।
इसके अलावा पुलिस और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को इन दवाओं के खतरों के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि इन्हें “खतरनाक दवा” के रूप में पहचान कर कार्रवाई की जा सके। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि विशेषज्ञ डॉक्टर के हस्ताक्षर वाले मूल पर्चे के बिना ऐसी दवाएं किसी को न बेची जाएं।
देश में यौन क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं के बाजार में कई बड़ी दवा कंपनियां सक्रिय हैं लेकिन नकली दवाओं का बढ़ता कारोबार जनस्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इसी कारण केंद्र सरकार ने इस पर कड़ी निगरानी और सख्त कार्रवाई का फैसला किया है।