नई दिल्लीः बढ़ती परिचालन लागत और वैश्विक अस्थिरता के बीच एयर इंडिया ने अपने खर्चों को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। एयरलाइन प्रबंधन ने कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में हर विभाग को खर्चों में कटौती पर गंभीरता से काम करना होगा। कंपनी ने फिलहाल वार्षिक वेतन वृद्धि को टालने का फैसला किया है, हालांकि कर्मचारियों को यह भरोसा भी दिलाया गया कि छंटनी की कोई योजना नहीं है।
शुक्रवार को आयोजित टाउनहॉल बैठक में एयर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैंपबेल विल्सन, मुख्य वित्त अधिकारी संजय शर्मा और मुख्य मानव संसाधन अधिकारी रविंद्र कुमार जीपी ने कर्मचारियों को कंपनी की मौजूदा आर्थिक स्थिति से अवगत कराया। बैठक में बताया गया कि एयरलाइन इस समय कई बाहरी चुनौतियों का सामना कर रही है, जिनका सीधा असर परिचालन लागत पर पड़ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया ने पिछले वित्त वर्ष का वेरिएबल पे जारी रखने और तय पदोन्नतियों को लागू करने का निर्णय बरकरार रखा है। लेकिन आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए कर्मचारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि को कम से कम एक तिमाही के लिए स्थगित कर दिया गया है। प्रबंधन का मानना है कि मौजूदा हालात में वित्तीय संतुलन बनाए रखना कंपनी की प्राथमिकता है।
कैंपबेल विल्सन ने कर्मचारियों से अपील की कि वे गैर-जरूरी खर्चों को तुरंत रोकें और जिन योजनाओं या खर्चों को टाला जा सकता है, उन्हें फिलहाल स्थगित रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जहां संभव हो, वहां लागत कम करने के लिए नए सिरे से दरों पर बातचीत की जाए। कंपनी अब हर स्तर पर वित्तीय अनुशासन लागू करने की दिशा में काम कर रही है।
एयर इंडिया फिलहाल बड़े परिवर्तन और विस्तार कार्यक्रम के दौर से गुजर रही है। एयरलाइन अपने बेड़े के आधुनिकीकरण और सेवाओं के विस्तार पर काम कर रही है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, हवाई क्षेत्र प्रतिबंध और विमान ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों ने उसकी चुनौतियां बढ़ा दी हैं। इन कारणों से हाल के महीनों में एयरलाइन की परिचालन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
कंपनी प्रबंधन ने कर्मचारियों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि मौजूदा कदम केवल आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे हैं और इनका उद्देश्य कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बनाना नहीं है। हालांकि वेतन वृद्धि टलने से कर्मचारियों के बीच चिंता जरूर बढ़ी है, लेकिन छंटनी न होने की घोषणा से कुछ राहत भी मिली है।