नई दिल्ली : अमेरिका की प्रौद्योगिकी कंपनी एप्पल ने भारत में पर्यावरण से जुड़े कई नए प्रकल्प शुरू करने की घोषणा की है। कंपनी ने कहा है कि वह नवीकरणीय ऊर्जा, प्लास्टिक कचरा नियंत्रण और हरित तकनीक आधारित नई कंपनियों में निवेश करेगी। इन पहलों के जरिए कंपनी वर्ष 2030 तक पूरी तरह कार्बन मुक्त बनने के अपने वैश्विक लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहती है।
कंपनी ने बताया कि भारत में नवीकरणीय ऊर्जा ढांचा तैयार करने के लिए शुरुआती चरण में 100 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। एप्पल के पर्यावरण और आपूर्ति श्रृंखला नवाचार विभाग की उपाध्यक्ष सारा चैंडलर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता उसे नई तकनीकों और स्वच्छ ऊर्जा निवेश की दिशा में आगे बढ़ा रही है।
इस परियोजना के लिए एप्पल ने क्लीनमैक्स नामक कंपनी के साथ साझेदारी की है जो भारत की बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों में शामिल है। इस सहयोग के तहत देश में 150 मेगावाट से अधिक नई स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन क्षमता तैयार की जाएगी। कंपनी का दावा है कि उसके शुरुआती निवेश से हर साल लगभग डेढ़ लाख भारतीय परिवारों की जरूरत के बराबर स्वच्छ बिजली तैयार की जा सकेगी। भविष्य में इस साझेदारी को और विस्तार देने की भी योजना है।
एप्पल पहले भी क्लीनमैक्स के साथ मिलकर भारत में अपने कार्यालयों और खुदरा स्टोरों की छतों पर सौर ऊर्जा परियोजनाएं शुरू कर चुका है। वर्तमान में ये केंद्र पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित हो रहे हैं।
प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के लिए भी कंपनी ने नई पहल शुरू की है। इस काम के लिए एप्पल विश्व वन्यजीव कोष-भारत के साथ मिलकर काम करेगा। गोवा में साहस ज़ीरो वेस्ट द्वारा चलाए जा रहे कचरा संग्रह और पुनर्चक्रण प्रकल्प के विस्तार में भी कंपनी सहयोग करेगी।
इस परियोजना के तहत प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा करने, छांटने और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग करने का काम किया जाता है। पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जाती है ताकि प्लास्टिक पर्यावरण में न फैले। एप्पल ने कहा कि उसकी मदद से इस मॉडल को अब कोयंबटूर समेत कई अन्य क्षेत्रों तक बढ़ाया जाएगा। इस काम में स्थानीय प्रशासन, समुदाय और कचरा संग्रह करने वाले कर्मचारियों को भी शामिल किया जाएगा।
हरित तकनीक आधारित नई कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए एप्पल ने एक्यूमेन नामक संस्था के साथ भी साझेदारी की है। इसके तहत शुरुआती चरण की छह पर्यावरण अनुकूल कंपनियों को आर्थिक सहायता, तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और कारोबारी सलाह दी जाएगी।
ये नई कंपनियां मुख्य रूप से कचरा प्रबंधन, पुनर्योजी खेती और चक्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में काम कर रही हैं। कंपनी का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ आर्थिक विकास को साथ लेकर आगे बढ़ना है।