नई दिल्ली : रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने अपने हालिया रिपोर्ट में बताया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगातार झटके और विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत की विशाल विदेशी मुद्रा भंडार ने इन उतार-चढ़ाव का असर महसूस नहीं होने दिया। मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2020 के बाद से भारत ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे स्थिर प्रदर्शन दिखाया है। भले ही विश्व अर्थव्यवस्था में कई बार झटके लगे हो भारत की अर्थव्यवस्था ने तुलनात्मक रूप से मजबूती बनाए रखी। इस दौरान निवेशकों का भरोसा बनाए रखना भी भारत के लिए महत्वपूर्ण रहा है जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बढ़ने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में रही।
भविष्य में संभावित आर्थिक झटकों का सामना करने के लिए भी भारत तैयार है यह मूडीज़ का विश्लेषण है। इसके पीछे का कारण है मजबूत मौद्रिक नीति ढांचा, नियंत्रित मूल्य वृद्धि की उम्मीद और जरूरत पड़ने पर विनिमय दर को संतुलित रखने की क्षमता। इन सभी कारकों ने भारत को अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर स्थिति में रखा है।
हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में सकारात्मक विश्लेषण के बावजूद रिपोर्ट में कुछ सीमाओं का भी जिक्र किया गया है। इसमें भारत के उच्च ऋण भार और कमजोर राजस्व घाटा शामिल है जो भविष्य में कई झटकों का सामना करते समय नीति की क्षमता को सीमित कर सकते हैं। फिर भी मजबूत घरेलू बाजार और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार संभावित जोखिमों को संभालने में मदद कर सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालिया अस्थिरता से पहले भारत ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए थे जिनके परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं। 2020 में कोविड का प्रभाव, 2022 में वैश्विक मुद्रास्फीति और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की सख्त मौद्रिक नीति 2023 की शुरुआत में अमेरिका में क्षेत्रीय बैंकिंग क्षेत्र पर दबाव और 2025 में शुल्क से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय तनाव जैसी घटनाओं के बावजूद भारत सहित उभरती अर्थव्यवस्थाएँ तुलनात्मक रूप से स्थिर रही हैं। इस सूची में भारत के अलावा इंडोनेशिया, मेक्सिको और अर्जेंटीना जैसे देश भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार इन झटकों के कारण आमतौर पर मुद्रा पर दबाव बढ़ता है और ऋण लेने की लागत में वृद्धि होती है। हालांकि हाल के समय में अनुकूल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं को इस दबाव को संभालने में मदद की है। भविष्य में यदि परिस्थितियाँ बदलती है तो प्रत्येक देश की नीतिगत क्षमता और वित्तीय सुरक्षा ढांचा इसकी स्थिरता का निर्णायक कारक बनेंगे यह मूडीज ने बताया है।