पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने पहुंचे। इस मुलाकात के दौरान भगवंत मान ने राष्ट्रपति के सामने एक बड़ी मांग रख दी है। क्या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनकी इस मांग को स्वीकार करेंगी? यह देखने वाली बात होगी। पर भगवंत मान ने राष्ट्रपति के सामने कौन सी बड़ी मांग रख दी है?
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति से राज्य के उन 6 राज्यसभा सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने का अनुरोध किया है जो हाल ही में आप छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए हैं। भगवंत मान ने इस बारे में एक संवैधानिक प्रावधान लाने की भी वकालत की जिससे मतदाता जनप्रतिनिधि के काम नहीं कर पाने पर उसे हटा सकें।
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार भगवंत मान राष्ट्रपति भवन में मुर्मू से अकेले मिले जहां उन्होंने सभी विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक ज्ञापन सौंपा। बैठक के दौरान करीब 90 विधायक रेल भवन पर थे।
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राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान भगवंत मान ने संविधान में जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने के प्रावधान की जरूरत पर जोर दिया। गौरतलब है कि फरवरी में राघव चड्ढा ने ‘वापस बुलाने का अधिकार’ प्रावधान लाने की वकालत की थी जो मतदाताओं को अधिकार दे कि जनप्रतिनिधि सही से काम नहीं करें तो उन्हें पांच साल के कार्यकाल से पहले हटा दिया जाए।
भगवंत मान ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए 7 सांसदों के दल-बदल को संविधान की ‘हत्या’ बताया। उन्होंने बैठक को बहुत अच्छा बताते हुए कहा कि 7 सांसदों का दूसरी पार्टी में विलय करना पूरी तरह से असंवैधानिक है। मैंने राष्ट्रपति जी से इस बारे में विस्तार से बात की।
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी को गत 24 अप्रैल को उस समय बड़ा झटका लगा था जब राज्यसभा में उसके 10 सदस्यों में से 7 राघव चड्ढा , अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, रजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल ने यह आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी कि ‘आप’ अपने मूल्यों और मूल सिद्धांतों से भटक गई है। इनमें मालीवाल को छोड़कर 6 सदस्य पंजाब से हैं।