कोलकाता: पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की हार के बाद इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने दावा किया कि यह परिणाम वास्तविक जनादेश नहीं, बल्कि एक साजिश का नतीजा है।
बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की लड़ाई भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग के खिलाफ थी, जिसने उनके अनुसार “भाजपा के लिए काम किया”।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि हमें जनता ने नहीं हराया बल्कि यह एक साजिश थी… मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी। वे संविधान के अनुसार जो कार्रवाई करना चाहें कर सकते हैं।”
उन्होंने मतगणना प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगाए। उनका कहना था कि लगभग 100 सीटों पर जनादेश “लूटा गया” और मतगणना को जानबूझकर धीमा किया गया ताकि उनकी पार्टी का मनोबल कमजोर किया जा सके। उन्होंने इसे इतिहास का “काला अध्याय” करार दिया।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर किया। ममता बनर्जी ने यह भी घोषणा की कि चुनाव के बाद कथित हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के लिए 10 सदस्यीय एक तथ्य-जांच समिति बनाई जाएगी, जो जमीनी स्थिति का आकलन करेगी।
उन्होंने 2021 के चुनाव के बाद हिंसा के आरोपों को निराधार बताया। ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद विपक्षी गठबंधन “इंडिया” के कई नेताओं ने उनसे संपर्क कर समर्थन जताया। उन्होंने बताया, “इंडिया गठबंधन के नेताओं ने फोन कर एकजुटता जताई। सोनिया जी और राहुल गांधी ने भी मुझसे बात की।”
उन्होंने कहा कि अब उनका ध्यान राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने पर रहेगा। 294 सदस्यीय विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी ने 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जिससे राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत हो गया।