कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले अब प्रशासनिक मुख्यालय को लेकर नई बहस छिड़ गई है। भाजपा ने संकेत दिया है कि सत्ता में आने पर राज्य सरकार का संचालन नबान्न से हटाकर फिर से राइटर्स बिल्डिंग से किया जा सकता है। प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य के बयानों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है।
इतिहास से जुड़ा है महाकरण का महत्व
राइटर्स बिल्डिंग केवल एक सरकारी इमारत नहीं, बल्कि बंगाल के प्रशासनिक इतिहास की पहचान रही है। 18वीं सदी में बनी यह इमारत लंबे समय तक राज्य का मुख्य सचिवालय रही। 2013 में ममता बनर्जी सरकार ने सुरक्षा और जगह की कमी के कारण अधिकांश विभागों को नबान्न स्थानांतरित कर दिया, जिसके बाद राइटर्स बिल्डिंग का महत्व कम जरूर हुआ, लेकिन खत्म नहीं हुआ।
आज भी सक्रिय हैं कई विभाग
वर्तमान में राइटर्स बिल्डिंग पूरी तरह बंद नहीं है। यहां गृह, पर्सनल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स, भूमि सुधार, कृषि, लोक निर्माण, कानून और संसदीय कार्य विभागों के कुछ हिस्से अब भी काम कर रहे हैं। सैकड़ों कर्मचारी रोज यहां आते हैं, जबकि दूसरी मंजिल पर मुख्यमंत्री कक्ष और मीटिंग रूम अभी भी पूरी तरह तैयार नहीं हो पाए हैं।
अधूरा जीर्णोद्धार और बढ़ती लागत
राइटर्स बिल्डिंग के पुनरुद्धार के लिए 2013 में बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी, जिसमें 200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। 2021 में बड़े पैमाने पर मरम्मत कार्य हुआ, लेकिन 2024 तक केवल 25-30 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका। बाकी काम के लिए अब भी भारी बजट की जरूरत बताई जा रही है।
जमीनी हकीकत में कई चुनौतियां
भवन की मौजूदा स्थिति कई सवाल खड़े करती है। कर्मचारियों के मुताबिक निचली मंजिलों पर शौचालयों में पानी की कमी, सफाई की अनियमितता और कचरा प्रबंधन की समस्या आम है। कई जगहों पर दीवारों से प्लास्टर और रंग झड़ रहे हैं, जिससे रखरखाव पर सवाल उठते हैं और कार्यस्थल की स्थिति प्रभावित होती है।
क्या फिर बनेगा सत्ता का केंद्र?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर राइटर्स बिल्डिंग को दोबारा प्रशासनिक मुख्यालय बनाना है, तो बुनियादी ढांचे को मजबूत करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। पानी, सफाई, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं के बिना यह बदलाव संभव नहीं होगा। राइटर्स बिल्डिंग से फिर से सरकार चलेगी या नहीं, यह जानना बेहद दिलचस्प होगा।