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राजस्थान रॉयल्स की बिक्री में अनियमितता? मालिकाना समूह का सनसनीखेज आरोप

मित्तल परिवार और आदार पुनावाला के पास पहुंची टीम की कमान।

जयपुर : इंडियन प्रीमियर लीग में हाल ही में दो बड़ी फ्रेंचाइजी-राजस्थान रॉयल्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की भारी-भरकम रकम में बिक्री को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। मार्च महीने में आईपीएल से जुड़ी इस सबसे बड़ी घोषणाओं में लगभग 15 हजार करोड़ रुपये में दोनों टीमों के बिकने की बात सामने आई थी जिससे भारतीय क्रिकेट जगत में उत्साह का माहौल बना था। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को बिड़ला समूह के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने खरीदा जबकि राजस्थान रॉयल्स को शुरुआत में काई सोमनानी के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम द्वारा खरीदे जाने की घोषणा की गई थी।

लेकिन बाद में स्थिति बदल गई और राजस्थान रॉयल्स का मालिकाना हक मित्तल परिवार और आदार पुनावाला समूह के पास चला गया। इस अचानक हुए बदलाव को लेकर काई सोमनानी ने गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

24 मार्च को यह जानकारी दी गई थी कि काई सोमनानी, रॉब वॉल्टन और हैम्प परिवार का कंसोर्टियम 15 हजार करोड़ रुपये में राजस्थान रॉयल्स खरीद रहा है। यह सौदा आईपीएल इतिहास के सबसे बड़े सौदों में से एक माना जा रहा था। लेकिन 3 मई को घोषणा की गई कि अब लक्ष्मीनारायण मित्तल और आदित्य मित्तल के नेतृत्व वाले मित्तल परिवार तथा आदार पुनावाला समूह मिलकर 15,660 करोड़ रुपये में टीम के नए मालिक बन गए हैं।

इसके बाद बताया गया कि काई सोमनानी का कंसोर्टियम खुद ही इस दौड़ से हट गया था लेकिन अब उन्होंने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि उन्हें जबरन बाहर किया गया। कंसोर्टियम की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि वे राजस्थान रॉयल्स की मालिकाना हिस्सेदारी का हिस्सा न बन पाने से निराश हैं और पिछले छह महीनों से इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल थे।

बयान में यह भी कहा गया कि उनके समूह में NFL, MLB, EPL, ला लीगा और TGL जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों के साथ काम करने का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ शामिल हैं। कंसोर्टियम ने दावा किया कि मीडिया में जो बातें कही जा रही हैं वे गलत हैं और उन्होंने कभी भी अपनी बोली वापस नहीं ली। उनके अनुसार उनके पास आवश्यक वित्तीय क्षमता मौजूद थी और सभी दस्तावेज पूरी ईमानदारी के साथ तैयार किए गए थे।

इस पूरे विवाद के बाद सवाल उठ रहा है कि असली स्थिति क्या है और कौन सा पक्ष सही है। हालांकि काई सोमनानी के कंसोर्टियम ने अब इस मामले को आगे न बढ़ाने की बात कही है और नए मालिकों को शुभकामनाएं भी दी हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार नए मालिकाना ढांचे में मित्तल परिवार के पास 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी आदार पुनावाला समूह के पास 18 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी जबकि शेष हिस्सेदारी मौजूदा मालिकों के पास रहेगी।

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