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बंगाल चुनाव 2026: भरत छेत्री की जीत, खेल मंत्री बनने की अटकलें तेज

कालिम्पोंग से बड़ी जीत के बाद राज्यभर में हॉकी अकादमी फैलाने की योजना।

कोलकाता : भाजपा की केंद्रीय समिति के प्रति आभार जताते हुए भरत छेत्री ने कहा कि उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर दिया गया

क्या आप ही बंगाल में भाजपा सरकार बनने पर संभावित नए खेल मंत्री होंगे? सोमवार की शाम कालिम्पोंग में जब लंदन ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रह चुके भरत छेत्री से फोन पर संपर्क किया गया तब उनके आसपास मौजूद भाजपा कार्यकर्ता उत्साह में गीत-संगीत में डूबे हुए थे जिससे बातचीत करना भी मुश्किल हो रहा था। मतगणना केंद्र से जीत का प्रमाणपत्र लेकर बाहर निकलने के बाद भरत ने फोन पर कहा की खेल मंत्री बनने को लेकर मैं कोई चिंता नहीं कर रहा हूं। मैं भाजपा की केंद्रीय समिति का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे चुनाव लड़ने का मौका दिया। अब नेतृत्व जो जिम्मेदारी देगा मैं उसे निभाऊंगा।

उन्होंने आगे कहा बंगाल में खेलों की प्रतिभा बहुत है लेकिन उसका सही उपयोग नहीं हुआ है। मैं स्वयं खेल से जुड़ा व्यक्ति हूं इसलिए निश्चित रूप से बंगाल के खेलों के विकास के लिए प्रयास करूंगा।

भाजपा में शामिल होने के बाद ही 45 वर्षीय भरत ने कालिम्पोंग सीट से जीत हासिल की। उन्होंने पिछले चुनाव के विजेता भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के रुदेन लेपचा को 21,625 वोटों से हराया। रुदेन तृणमूल कांग्रेस के सहयोगी थे। अपने खेल जीवन और कोचिंग करियर का अधिकांश समय बेंगलुरु में बिताने के बावजूद भरत पिछले तीन वर्षों से कालिम्पोंग में रह रहे हैं। यहां उन्होंने एक हॉकी अकादमी स्थापित की है जिसे अब वे पूरे बंगाल में विस्तार देना चाहते हैं।

हालांकि भरत का राजनीतिक जीवन जीत के साथ शुरू हुआ उत्तर बंगाल में तृणमूल के दो उम्मीदवार-राष्ट्रीय स्तर की पूर्व स्टार स्वप्ना बर्मन और शिवशंकर पाल-को हार का सामना करना पड़ा। 2018 के जकार्ता एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली हेप्टाथलॉन एथलीट स्वप्ना ने नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे की नौकरी छोड़कर जलपाईगुड़ी के राजगंज से चुनाव लड़ा था। यह सीट पहले तृणमूल के पास थी इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि वे विधायक बनकर उत्तर बंगाल में खेलों के विकास में योगदान देंगी। लेकिन उन्हें भाजपा के दिनेश सरकार के खिलाफ 21 हजार से अधिक वोटों से हार का सामना करना पड़ा।

क्रिकेटर के रूप में राजनीति में उतरकर लक्ष्मीरतन शुक्ला मनोज तिवारी और अशोक डिंडा पहले ही विधायक बन चुके हैं। लेकिन उनके ही साथी शिवशंकर पाल (मैक्को) तृणमूल के टिकट पर कूचबिहार के तुफानगंज से चुनाव लड़कर भाजपा की मालती राय से हार गए। मालती इस सीट से पहले भी विजेता रह चुकी हैं।

लक्ष्मीरतन और मनोज को दूसरी बार चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला लेकिन तेज गेंदबाज अशोक डिंडा को यह अवसर मिला और उन्होंने इसका पूरा फायदा उठाया। उन्होंने पूर्व मेदिनीपुर के मयना से एक बार फिर चुनाव लड़कर तृणमूल के चंदन मंडल को हराया। 2021 में अशोक ने मात्र 1,260 वोटों से जीत दर्ज की थी जबकि इस बार उन्होंने 14 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की। लगातार दो बार जीतने के बाद अब वे मंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।

दोबारा जीत का सपना पूर्व फुटबॉलर विदेश बोस के लिए पूरा नहीं हो सका। मोहन बागान और मोहम्मडन क्लब के लिए खेलने वाले विदेश ने हुगली के सप्तग्राम से तृणमूल उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा लेकिन भाजपा के स्वराज घोष से 23 हजार से अधिक वोटों से हार गए। चार साल पहले वे उलूबेड़िया (पूर्व) से जीत चुके थे लेकिन इस बार सीट बदलना उनकी हार का कारण माना जा रहा है।

मैदान के परिचित रेफरी प्रतीक मंडल इस बार आईएसएफ के उम्मीदवार के रूप में मिनाखां से चुनाव मैदान में उतरे थे। चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने आईएसएल के मैचों में रेफरी की भूमिका निभाई। शुरुआती कुछ चरणों की मतगणना में वे आगे चल रहे थे लेकिन अंत में तृणमूल की ऊषारानी मंडल के हाथों हार गए।

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