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साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने किसान जीवन और संघर्ष पर रखे विचार, उपन्यास को बताया क्लासिक कृति

आसनसोल में ‘भारतीय किसान की त्रासदी’ पर गहन चर्चा, ‘अगम बहै दरियाव’ बना केंद्र बिंदु।

By रजनीश प्रसाद

May 04, 2026 22:03 IST

आसनसोल : पश्चिम बंगाल के आसनसोल स्थित बर्नपुर जिला पुस्तकालय में ‘सहयोग’ संस्था के तत्वावधान में “भारतीय किसान की त्रासदी एवं ‘अगम बहै दरियाव’” विषय पर एक महत्वपूर्ण परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत परास्नातक छात्रा प्रिया के सरस्वती वंदना से हुई।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध कथाकार शिवमूर्ति उपस्थित रहे जिनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। नीतू निशा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए उपन्यास में भारतीय किसानों के संघर्ष और समस्याओं पर अपने विचार रखे। इसके बाद आरती कुमारी ने शिवमूर्ति का संक्षिप्त परिचय दिया जबकि डॉ. रीता जायसवाल ने उपन्यास का एक महत्वपूर्ण अंश पाठ किया।

कार्यक्रम में सृजन सरोकार के सहायक संपादक और युवा आलोचक अवनीश यादव ने कहा कि आज का समय कृतज्ञता के अभाव का दौर है जबकि इस उपन्यास में लेखक ने सहयोग करने वालों के प्रति आभार व्यक्त किया है। विश्व-भारती विश्वविद्यालय की सहायक प्राध्यापक डॉ. श्रुति कुमुद ने उपन्यास को क्लासिक बताते हुए कहा कि इसमें कई ऐसी कहानियाँ हैं जिन पर विस्तार से चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि शिवमूर्ति के लेखन में लोक जीवन और संघर्ष का वास्तविक चित्रण मिलता है।

वक्ता राहुल सिंह ने कहा कि इस उपन्यास में ऐसे गुण हैं जो इसे क्लासिक साहित्य की श्रेणी में स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इसमें दलित और वंचित वर्गों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। निशांत ने इसे गोदान के समकक्ष बताते हुए कहा कि आने वाले समय में इसका महत्व और स्पष्ट होगा।

डॉ. चंदन पांडे ने उपन्यास में प्रेम और उसकी जटिलताओं पर विचार रखे। काज़ी नजरुल विश्वविद्यालय की सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रतिमा प्रसाद ने किसान जीवन के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहलुओं का विश्लेषण प्रस्तुत किया। वहीं बी.बी. कॉलेज के डॉ. के.के. श्रीवास्तव और रामजी सिंह यादव ने भी किसानों की स्थिति और साहित्य में उनकी अभिव्यक्ति पर गंभीर चर्चा की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार शिवकुमार यादव ने की। उन्होंने कहा कि ‘अगम बहै दरियाव’ के माध्यम से किसान जीवन की गहरी संवेदनाओं को समझने में आलोचक अभी पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं और इस दिशा में आगे काम करने की जरूरत है।

कार्यक्रम का संचालन युवा अध्येता बजरंगबली कहार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जयराम पासवान ने दिया। इस अवसर पर कथाकार सृंजय, कवि संजय राय, मनोज यादव, गौतम लामा, मनोहरभाई पटेल, नवीन चंद्र सिंह, दिनेश गुप्ता गर्ग, अवधेश कुमार, विद्योत्मा झा, भगवंत शर्मा, संजय भालोटिया सहित बड़ी संख्या में छात्र और शोधार्थी उपस्थित रहे।

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