कोलकाता : कोलकाता में भारतीय भाषा परिषद के स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में देश की आठ भारतीय भाषाओं के लेखकों को साहित्य सम्मान प्रदान किया गया। परिषद के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ और युवा साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।
वरिष्ठ साहित्य सम्मान असमिया लेखक दीपक कुमार बरकाकाती, हिंदी के वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना, कन्नड़ की लेखिका जानकी निवास मूर्ति वैदेही और उर्दू के लेखक अनीस अशफाक को दिया गया। इन सभी को मोमेंटो, मानपत्र और एक-एक लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई।
युवा साहित्य पुरस्कार गुजराती के अजय सोनी, बांग्ला के पीयूष सरकार, मलयालम की जिन्शा गंगा और हिंदी की लेखिका दिव्या विजय को दिया गया। प्रत्येक युवा लेखक को मोमेंटो, मानपत्र और 51 हजार रुपये की राशि दी गई।
कार्यक्रम की शुरुआत परिषद की अध्यक्ष डॉ. कुसुम खेमानी के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के लेखकों की शब्द साधना का सम्मान करना गर्व की बात है। समारोह के मुख्य अतिथि और प्रसिद्ध बांग्ला कथाकार रामकुमार मुखोपाध्याय ने कहा कि परिषद की परंपरा भारतीय भाषाओं के बीच सद्भाव और प्रेम को मजबूत करना है।
इस अवसर पर ‘लेखक : वैश्विक मानवता और शांति’ विषय पर परिचर्चा भी आयोजित की गई। असमिया कथाकार दीपक कुमार बरकाकाती ने कहा कि लेखक केवल लेखक नहीं बल्कि एक प्रभावशाली वक्ता भी होता है। उर्दू लेखक अनीस अशफाक ने कहा कि कलम हमारी ताकत है और इसे कभी छोड़ा नहीं जा सकता।
कन्नड़ लेखिका वैदेही ने कहा कि जब तक स्त्री और बच्चों की आवाज नहीं सुनी जाएगी तब तक शांति संभव नहीं है। हिंदी कवि नरेश सक्सेना ने साहित्य की गरिमा और वैश्विक मानवता के महत्व पर अपने विचार रखे।
युवा लेखकों ने भी अपने विचार साझा किए। अजय सोनी ने कहा कि केवल बड़ी डिग्री किसी इंसान को महान नहीं बनाती। पीयूष सरकार ने साहित्य को भीतर की चेतना का परिणाम बताया। जिन्शा गंगा ने कहा कि मानवता को मजबूत करने में साहित्य की अहम भूमिका होती है। दिव्या विजय ने दुनिया में चल रहे युद्धों और उससे होने वाले विनाश पर चिंता जताई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के निदेशक डॉ. शंभुनाथ ने की। उन्होंने कहा कि इतिहास और राजनीति जहां दूरियां पैदा करते हैं वहीं लेखक समाज में पुल बनाने का काम करते हैं।
समारोह में श्रीमती बिमला पोद्दार, घनश्याम सुगला, आशीष झुनझुनवाला और विजय हलवासिया सहित कई विशिष्ट लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजश्री शुक्ला ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन परिषद के उपाध्यक्ष प्रदीप चोपड़ा और अंत में आशीष झुनझुनवाला ने किया।