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ऊर्जा संकट में रणनीतिक बफर जरूरी: CEA नगेश्वरन की चेतावनी, महंगाई और वित्तीय दबाव बढ़ने के संकेत

पश्चिम एशिया संकट से तेल-गैस कीमतों में उछाल, CAD और महंगाई पर असर की आशंका। AI से रोजगार संरचना में बदलाव की जरूरत पर जोर।

By श्वेता सिंह

May 02, 2026 19:41 IST

नई दिल्लीः मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने शनिवार को कहा कि भारत को मौजूदा वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच “रणनीतिक बफर” तैयार करने की तत्काल जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह संकट पिछले कई दशकों के ऊर्जा झटकों की तुलना में अधिक गंभीर और जटिल है।

यह बयान उन्होंने अशोक विश्वविद्यालय में आयोजित एक आर्थिक सम्मेलन के दौरान दिया, जहां उन्होंने वैश्विक अस्थिरता और भारत पर इसके प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण किया।

ऊर्जा संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर

अनंथा नागेश्वरन ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेजी आई है। इससे भारत के लिए वित्तीय घाटा (fiscal deficit) 4.3 प्रतिशत के लक्ष्य को हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सामान्य से कमजोर मानसून और ऊर्जा कीमतों के प्रभाव से महंगाई में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

CAD और व्यापार संतुलन पर दबाव

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में भारत का चालू खाता घाटा (CAD) GDP के 2 प्रतिशत से अधिक हो सकता है, जो पिछले वर्ष 1 प्रतिशत से भी कम था। उन्होंने इसे वैश्विक ऊर्जा संकट और आयात पर निर्भरता का सीधा परिणाम बताया।

रणनीतिक बफर और आत्मनिर्भरता पर जोर

नागेश्वरन ने कहा कि भारत को केवल ऊर्जा ही नहीं, बल्कि निकेल, टिन और कॉपर जैसे महत्वपूर्ण खनिजों में भी रणनीतिक भंडार तैयार करने चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि भारत को विनिर्माण क्षेत्र में मजबूत बनना है, तो उसे आयात निर्भरता कम करनी होगी और ऐसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना होगा जो देश को “इंडिस्पेंसेबल” बनाएं।

AI से रोजगार पर नया खतरा

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से रोजगार संरचना में बदलाव की चेतावनी भी दी। नागेश्वरन के अनुसार, भारत के आईटी सेक्टर को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना जरूरी है ताकि AI के कारण नौकरियों का नुकसान न हो, बल्कि AI आधारित नए रोजगार सृजित किए जा सकें।

ऊर्जा संकट का बहुआयामी असर

अनंथा नागेश्वरन ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट केवल तेल की कीमतों तक सीमित नहीं है।

इसके चार प्रमुख प्रभाव हैं—

-कीमत और आपूर्ति पर दबाव

-व्यापार प्रभावित होना

-लॉजिस्टिक्स लागत में बढ़ोतरी

-रेमिटेंस पर असर

उन्होंने बताया कि भारत अपनी LPG जरूरत का 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से 90 प्रतिशत आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है, जो वर्तमान में तनाव का केंद्र है।

सरकार की नीति और संतुलन की चुनौती

नागेश्वरन ने कहा कि सरकार पहले से ही पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती जैसे कदमों से उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सरकार, तेल कंपनियों, मुद्रास्फीति और घरेलू उपभोक्ताओं के बीच “बैलेंसिंग एक्ट” जरूरी होगा।

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने स्पष्ट किया कि भले ही भारत अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा संकट लंबे समय तक बना रह सकता है। इसलिए आर्थिक स्थिरता के लिए रणनीतिक तैयारी और नीतिगत लचीलापन बेहद जरूरी है।

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