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AAP से इस्तीफा देने वाले सात राज्यसभा सांसदों पर विवाद, राजनीतिक घमासान तेज

पंजाब विधानसभा में विश्वास मत जीतकर सरकार की ताकत दिखाई, 2027 में बड़ी जीत का दावा

चंडीगढ़ : आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के कुछ ही दिनों के भीतर राज्यसभा सांसद संदीप पाठक कानूनी विवादों में घिर गए हैं। समाचार एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब पुलिस ने उनके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में दो मामले दर्ज किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी की आशंका के चलते उन्होंने शनिवार को ही नई दिल्ली स्थित अपना सरकारी आवास छोड़ दिया।

जानकारी के अनुसार, आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए अभी एक सप्ताह भी पूरा नहीं हुआ है। इसी बीच शनिवार सुबह एक वीडियो सामने आया जिसमें संदीप पाठक के आवास के बाहर पुलिस की गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। इसके बाद एक अन्य वीडियो भी सामने आया (हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है), जिसमें उन्हें पीछे के दरवाजे से निकलकर एक वाहन में बैठकर जाते हुए देखा गया। सूत्रों का यह भी कहना है कि उनका मोबाइल फोन फिलहाल बंद है और उनकी वर्तमान लोकेशन स्पष्ट नहीं है। साथ ही यह खबर भी सामने आई है कि उन्हें कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए भाजपा का विधिक प्रकोष्ठ सक्रिय हो गया है।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी को छोड़कर राघव चड्ढा के साथ सात राज्यसभा सांसदों ने भाजपा का दामन थाम लिया था। इस समूह में संदीप पाठक भी शामिल हैं। अन्य सांसदों में राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत साहनी शामिल हैं। इन सभी ने 24 अप्रैल को पार्टी छोड़ने की घोषणा की थी।

इन सांसदों का आरोप है कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों, नीतियों और विचारधारा से भटक गई है। स्वाति मालीवाल को छोड़कर बाकी छह सांसद राज्यसभा में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं।

सात सांसदों द्वारा एक साथ इस्तीफा देने के कारण यह संख्या कुल सदस्यों के दो-तिहाई के बराबर बनती है। ऐसे में संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत इनके अयोग्य घोषित किए जाने की संभावना नहीं बनती।

इधर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की है कि वह 5 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। उनका कहना है कि यह दल-बदल ‘अवैध’ और ‘असंवैधानिक’ है तथा यह जनता के साथ विश्वासघात के समान है।

छह सांसदों के इस विद्रोह के बाद भगवंत मान ने पंजाब विधानसभा में अपनी सरकार की ताकत भी साबित की है। 117 सदस्यों वाली विधानसभा में उन्होंने विश्वास मत हासिल किया। वर्तमान में आम आदमी पार्टी के 94 विधायक हैं, कांग्रेस के 16, बहुजन समाज पार्टी का 1 विधायक, शिरोमणि अकाली दल के 3 विधायक, भाजपा के 2 विधायक और एक निर्दलीय विधायक है।

विश्वास मत के दौरान आम आदमी पार्टी के 88 विधायक उपस्थित थे। इनमें से दो विधायक विदेश में थे, दो जेल में और दो अस्पताल में भर्ती थे।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी को जनता का समर्थन अभी भी मजबूत रूप से प्राप्त है और पार्टी वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में और बड़ी जीत दर्ज करेगी।

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