नई दिल्ली: विमानन क्षेत्र में बढ़ती परिचालन लागत और जेट फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में तेज उछाल का असर अब देश की प्रमुख एयरलाइन एयर इंडिया (Air India) पर साफ दिखाई दे रहा है। कंपनी ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रतिदिन लगभग 100 उड़ानों में कटौती करने की घोषणा की है। यह कटौती घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूट्स पर लागू होगी।
एयर इंडिया (Air India) वर्तमान में करीब 1,100 उड़ानें प्रतिदिन संचालित करती है। नई कटौती के बाद लगभग 10 प्रतिशत उड़ानें प्रभावित होंगी। सबसे अधिक असर यूरोप, उत्तर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जैसे लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर देखने को मिलेगा।
चरणबद्ध कटौती और यात्रियों के लिए व्यवस्था
एयर इंडिया (Air India) ने स्पष्ट किया है कि उड़ानों में यह कमी अचानक नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है।
कंपनी के अनुसार, अप्रैल और मई में पहले ही कुछ उड़ानों में कमी की जा चुकी है। अब आने वाले महीनों में आवश्यकता अनुसार और बदलाव किए जाएंगे। जिन यात्रियों की उड़ानें प्रभावित होंगी, उन्हें पहले से सूचना दी जाएगी। एयरलाइन ने कहा है कि यात्रियों को या तो वैकल्पिक उड़ानें दी जाएंगी या पूरा रिफंड उपलब्ध कराया जाएगा।
जेट फ्यूल की कीमतें और लागत का दबाव
एयरलाइन के अनुसार, विमानन ईंधन (ATF) की कीमतों में लगातार वृद्धि ने ऑपरेशनल खर्च को असामान्य रूप से बढ़ा दिया है। ईंधन, जो किसी भी एयरलाइन की कुल लागत का लगभग 40 प्रतिशत होता है, अब कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लाभ के बजाय घाटे में ले जा रहा है।
इसके साथ ही लंबी दूरी के रूट्स और कुछ हवाई क्षेत्रों में बाधाओं ने भी उड़ानों की लागत को और बढ़ा दिया है।
कंपनी की रणनीति, वित्तीय स्थिति और भविष्य
एयर इंडिया के सीईओ कैम्पबेल विल्सन ने कर्मचारियों को भेजे गए आंतरिक संदेश में कहा कि कंपनी लगातार बदलती परिस्थितियों से जूझ रही है। उन्होंने बताया कि किराया बढ़ाने और फ्यूल सरचार्ज लगाने की कोशिश की गई थी, लेकिन इसका सीमित असर पड़ा है।
इससे यात्रियों की संख्या पर भी असर देखने को मिला है। रिपोर्टों के अनुसार, एयर इंडिया पहले से ही भारी वित्तीय दबाव में है और वित्त वर्ष 2026 में इसका अनुमानित नुकसान लगभग 20,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
कंपनी ने संकेत दिया है कि यदि वैश्विक तेल बाजार और भू-राजनीतिक स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में उड़ानों में और कटौती की जा सकती है।
जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों, वैश्विक अनिश्चितता और परिचालन लागत के दबाव ने एयर इंडिया को उड़ानों में भारी कटौती करने पर मजबूर कर दिया है। यह फैसला जहां कंपनी की वित्तीय स्थिति को संतुलित करने की कोशिश है, वहीं यात्रियों के लिए अल्पकालिक असुविधा भी पैदा कर सकता है।