नयी दिल्ली : बंगाल सहित पांच राज्यों की विधानसभा चुनावों के परिणाम आने से एक दिन पहले, रविवार को संसद मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजु ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने लिखा।"सभी विरोधी दल सरकारी संस्थाओं, ईवीएम, निर्वाचन आयोग और मीडिया पर हमला कर चुके हैं। अब न्यायपालिका को भी निशाना बना रहे हैं। ये नहीं समझ रहे कि वे वास्तव में भारतीय लोकतंत्र की जड़ को चोट पहुँचा रहे हैं। प्रतीक्षा कीजिए भारत की जनता इन्हें उपयुक्त जवाब देगी और उन्हें जीवन भर की सीख देगी।"
रिजिजु के इस पोस्ट के कुछ घंटे पहले ही बंगाल के फलता विधानसभा केंद्र के 285 बूथों में पुन: मतदान कराने की घोषणा निर्वाचन आयोग ने की। आयोग की रिपोर्ट में इस विधानसभा केंद्र पर मतदान प्रक्रिया में कई गंभीर खामियों का उल्लेख किया गया है जिससे प्रिसाइडिंग ऑफिसर, जनरल ऑब्जर्वर, माइक्रो ऑब्जर्वर और केंद्रीय बलों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। हालांकि रिजिजु ने अपने पोस्ट में सीधे फलता या पश्चिम बंगाल का नाम नहीं लिया। इसके तुरंत बाद कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने पलटवार करते हुए कहा सारा देश जानता है कि कौन लोकतंत्र की जड़ों पर चोट कर रहा है और कौन केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रहा है।"वही राजद के वरिष्ठ सांसद मनोज झा ने कहा,"हमने बंगाल में मतदान की प्रक्रिया नहीं देखी, ऐसा लग रहा था जैसे बंगाल में युद्ध चल रहा हो। इतनी व्यवस्था, इतनी सुरक्षा के बावजूद फलता में पुन: मतदान का निर्णय लिया गया जिससे निर्वाचन आयोग की कार्यक्षमता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
केंद्रीय मंत्री रिजिजु का यह पोस्ट ऐसे समय पर आया है, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया और मतदान सूची में किए गए विशेष संशोधनों (सार) को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग पर भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा, भाजपा विरोधी दलों का आरोप है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के संवैधानिक संस्थानों पर अपना प्रभुत्व स्थापित किया है और उन्हें अपने राजनीतिक हित साधने के लिए पूरी तरह नियंत्रित किया है।
विरोधी दलों के सूत्रों के अनुसार पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद मई में दिल्ली में एक बैठक हो सकती है। इस बैठक में तय किया जाएगा कि भाजपा और मोदी सरकार के विरुद्ध भविष्य में किस दिशा में रणनीति बनाई जाए। इसके साथ ही अगले वर्ष उत्तर प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और पंजाब के विधानसभा चुनावों के लिए विपक्ष का प्रारंभिक रणकौशल भी इसी बैठक में तय किया जा सकता है।