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सरकारी बैंक साइबर हमलों से बचाव के लिए तकनीक और निवेश दोनों बढ़ा रहे

एआई मॉडल से बढ़ते जोखिम को देखते हुए बैंक मजबूत कर रहे सुरक्षा ढांचा।

By शिखा सिंह

May 04, 2026 17:38 IST

नई दिल्ली : देश के सरकारी बैंकों ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में अपने खर्च को बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य साइबर सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाना है ताकि ग्राहकों के डेटा और बैंकिंग प्रणाली को संभावित खतरों से सुरक्षित रखा जा सके।

हाल ही में देश की साइबर सुरक्षा एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सर्ट-इन) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी एंथ्रॉपिक के नए मॉडल ‘क्लॉड माइथोस’ को लेकर चिंता जताई थी। ‘डिफेंडिंग अगेंस्ट फ्रंटियर एआई ड्रिवन साइबर रिस्क्स’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में इस एआई मॉडल को साइबर सुरक्षा के लिए संभावित खतरा बताया गया है।

इस रिपोर्ट के सामने आने से पहले ही देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बैठक में इस तकनीक के बैंकिंग क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर चर्चा की थी। इसके बाद कई सरकारी बैंकों ने अपने ग्राहकों के दस्तावेजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कदम उठाने शुरू कर दिए।

समाचार एजेंसियों के अनुसार कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अब अपने आईटी बजट में बढ़ोतरी कर रहे हैं ताकि साइबर सुरक्षा ढांचे को और सशक्त बनाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘क्लॉड माइथोस’ जैसे उन्नत एआई मॉडल अपने अत्याधुनिक कोडिंग कौशल के जरिए किसी भी सॉफ्टवेयर या प्लेटफॉर्म की साइबर सुरक्षा में मौजूद कमजोरियों को तेजी से पहचान सकते हैं। इससे हैकर्स को नए अवसर मिल सकते हैं और बैंकिंग सिस्टम पर खतरा बढ़ सकता है।

इसी जोखिम को देखते हुए बैंकिंग संस्थान सतर्क हो गए हैं और अपनी सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने में जुटे हैं।

इस विषय पर स्वरूप कुमार साहा जो पंजाब एंड सिंध बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि यह एआई मॉडल बैंकों के लिए एक नई चुनौती के रूप में उभरा है। उन्होंने बताया कि साइबर हमलों से बचाव के लिए बैंक आईटी क्षेत्र में अपने निवेश को बढ़ा रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चालू वित्त वर्ष में उनका बैंक भी एआई से जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए आईटी खर्च में वृद्धि कर रहा है।

इसी तरह अश्विनी कुमार, जो यूको बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं ने भी कहा कि उनका बैंक 2026-27 वित्त वर्ष में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आईटी क्षेत्र में अधिक निवेश करेगा। यह निवेश पिछले वित्त वर्ष की तुलना में अधिक होगा।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में किसी सॉफ्टवेयर या प्लेटफॉर्म की साइबर कमजोरी सामने आने के बाद उसे हैकर्स द्वारा हथियार बनाने में औसतन 19 दिन का समय लगता था। लेकिन अब यह समय घटकर केवल 72 घंटे रह गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि साइबर खतरों की गति और गंभीरता दोनों बढ़ चुकी हैं।

इसी कारण ‘क्लॉड माइथोस’ जैसे एआई मॉडल से उत्पन्न संभावित साइबर जोखिमों से निपटने के लिए बैंकिंग क्षेत्र तेजी से कदम उठा रहा है, ताकि भविष्य में किसी बड़े खतरे को समय रहते रोका जा सके।

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