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तमिलनाडु राजनीति में बड़ा उलटफेर: कोलाथुर सीट पर बदलते समीकरण

कोलाथुर चुनाव 2026: एम. के. स्टालिन को टीवीके उम्मीदवार से कड़ी टक्कर।

By शिखा सिंह

May 04, 2026 15:41 IST

चेन्नई : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के बीच कोलाथुर सीट का मुकाबला बेहद चर्चित और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया है। इस सीट से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एवं एम. के. स्टालिन लगातार 15 वर्षों से विधायक रहे हैं लेकिन इस बार शुरुआती रुझानों में वह पीछे चल रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार कोलाथुर सीट पर वी. एस. बाबू जो अभिनेता विजय की राजनीतिक पार्टी तमिलाग वेट्री कझगम (टीवीके) के उम्मीदवार हैं मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन को 10 राउंड की मतगणना के बाद 8455 वोटों से पीछे कर दिया है। इस सीट पर तीसरे स्थान पर आर. संथानकृष्णन हैं जो ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एआईएडीएमके) के उम्मीदवार हैं और वे वी. एस. बाबू से 31325 वोटों के अंतर से पीछे चल रहे हैं।

वी. एस. बाबू पहले वर्ष 2006 से 2011 तक द्रविड़ मुनेत्र कझगम (द्रमुक) के विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में वे कोलाथुर सीट से एम. के. स्टालिन के चुनाव प्रबंधन से भी जुड़े थे लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी छोड़कर ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एआईएडीएमके) का दामन थाम लिया था। इसके बाद इसी वर्ष 7 फरवरी 2026 को उन्होंने एक बार फिर राजनीतिक रुख बदलते हुए टीवीके की सदस्यता ग्रहण की और उसी पार्टी के टिकट पर कोलाथुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उनकी इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ मानी जाती है।

कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र का गठन वर्ष 2011 में विल्लिवक्कम और पुरसावक्कम विधानसभा क्षेत्रों के कुछ हिस्सों को मिलाकर किया गया था। इसके गठन के बाद से इस सीट पर एम. के. स्टालिन लगातार विधायक रहे हैं।

वर्ष 2011 के पहले चुनाव में उन्होंने ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम के उम्मीदवार सैदई दुरईस्वामी को केवल 2734 वोटों के अंतर से हराया था। इसके बाद वर्ष 2016 के चुनाव में उन्होंने जे. सी. डी. प्रभाकर को 37,730 वोटों से पराजित किया था, जबकि वर्ष 2021 में उन्होंने एआईएडीएमके के आदिराजराम को 70,384 वोटों के बड़े अंतर से हराया था।

एम. के. स्टालिन का राजनीतिक सफर केवल कोलाथुर तक सीमित नहीं रहा है। इससे पहले वे थाउजेंड लाइट्स विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते थे। वर्ष 1984 में उन्होंने अपना पहला चुनाव वहीं से लड़ा था जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था लेकिन वर्ष 1989 में उन्होंने वापसी की और जीत दर्ज की। वर्ष 1991 में वे फिर हार गए लेकिन वर्ष 2001 के बाद से वे लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं।

थाउजेंड लाइट्स विधानसभा क्षेत्र से वे चार बार विधायक रहे और कोलाथुर से अब तक तीन बार विधायक बन चुके हैं। इस प्रकार वे कुल मिलाकर अब तक सात बार विधायक चुने जा चुके हैं। अपने राजनीतिक करियर के दौरान वे चेन्नई के मेयर अपने पिता एवं तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री और उपमुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं। वर्ष 2016 में वे नेता प्रतिपक्ष बने और वर्ष 2021 से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं।

एम. के. स्टालिन का संबंध तमिलनाडु की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक विरासत से जुड़ा है। वे पांच बार मुख्यमंत्री रहे एम. करुणानिधि और उनकी दूसरी पत्नी दयालु अम्मल के पुत्र हैं। वर्तमान में वे द्रविड़ मुनेत्र कझगम (द्रमुक) पार्टी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।

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