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तीन घंटे की गिनती में बदला सियासी गणित, नई पार्टी टीवीके ने द्रविड़ राजनीति के गढ़ में बनाई मजबूत पकड़

1967 और 1977 जैसे ऐतिहासिक बदलाव की ओर संकेत, तमिलनाडु में इस बार दिख सकता है बड़ा राजनीतिक परिवर्तन।

By रजनीश प्रसाद

May 04, 2026 11:45 IST

चेन्नई : तमिलनाडु विधान सभा चुनाव की मतगणना के दौरान सोमवार को चौंकाने वाले रुझान सामने आए। अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 98 निर्वाचन क्षेत्रों में बढ़त बना ली है। 23 अप्रैल को हुए मतदान के बाद जारी मतगणना में यह नई पार्टी राज्य के पारंपरिक द्रविड़ दलों से आगे निकल गई है।

सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) इस बार कमजोर स्थिति में दिख रही है और केवल 35 क्षेत्रों में आगे है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन तथा उनके पुत्र और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन दोनों ही चेन्नई स्थित अपनी-अपनी सीटों पर पीछे चल रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार राज्य के 15 मंत्रियों की स्थिति भी पिछड़ने वाली है। कोलाथुर क्षेत्र में स्टालिन, टीवीके के वी. एस. बाबू से 2277 मतों से पीछे हैं जबकि चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी क्षेत्र में उधयनिधि भी पीछे चल रहे हैं।

वहीं एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) 63 क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए है। उसकी सहयोगी पट्टाली मक्कल कषगम (पीएमके) 6 क्षेत्रों में आगे है। पलानीस्वामी स्वयं एडप्पादी क्षेत्र से 10 हजार से अधिक मतों से आगे चल रहे हैं।

करीब तीन घंटे की मतगणना के बाद टीवीके ने तेजी से बढ़त बनाकर द्रविड़ राजनीति के दोनों प्रमुख दलों को पीछे छोड़ दिया। यदि ये रुझान बने रहते हैं तो यह राज्य में एक बड़ा चुनावी परिवर्तन साबित हो सकता है। अपने चुनाव प्रचार में विजय ने 1967 और 1977 जैसे ऐतिहासिक राजनीतिक बदलावों का उल्लेख किया था और मौजूदा स्थिति उसी की ओर संकेत कर रही है।

वर्ष 1967 में सी. एन. अन्नादुराई ने तमिलनाडु में स्वतंत्रता के बाद पहली गैर-कांग्रेस सरकार बनाई थी। इसके दस वर्ष बाद 1977 में एम. जी. रामचंद्रन ने एआईएडीएमके की पहली सरकार बनाकर एम. करुणानिधि के नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से हटा दिया था। 1967 के बाद से राज्य में इन दोनों द्रविड़ दलों का ही शासन रहा है जिस कारण तमिलनाडु को द्रविड़ राजनीति का गढ़ कहा जाता है।

टीवीके चेन्नई के अधिकांश निर्वाचन क्षेत्रों में आगे चल रही है जिन्हें अब तक डीएमके का मजबूत क्षेत्र माना जाता था और जो 234 सदस्यीय विधान सभा में उसी के प्रतिनिधित्व में थे। पहले आए अधिकांश एग्जिट पोल में डीएमके को बढ़त मिलने का अनुमान लगाया गया था लेकिन वर्तमान रुझान इसके विपरीत नजर आ रहे हैं।

अन्य रुझानों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी 26 क्षेत्रों में पीछे चल रही है और केवल थाली क्षेत्र में आगे है। टीवीके पोननेरी, तिरुवल्लूर, पूनामल्ले और अवडी जैसे क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए है। वहीं डीएमके वेल्लोर, अनैकट्टू और रिशिवंदियम क्षेत्रों में आगे है।

चुनाव आयोग और विभिन्न समाचार चैनलों के अनुसार तिरुचिरापल्ली पूर्व क्षेत्र में विजय दो चरणों की मतगणना के बाद 3,000 से अधिक मतों से आगे चल रहे हैं। कुल मिलाकर तमिलनाडु के ये रुझान राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दे रहे हैं।

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