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अमित शाह की रणनीति और संगठन की ताकत से बदली तस्वीर, बंगाल में भाजपा के लिए ऐतिहासिक मौका

‘साइलेंट हीरो’ नेताओं की रणनीति आई काम, बाहरी राज्यों के नेताओं ने चुपचाप मजबूत की भाजपा की पकड़।

By रजनीश प्रसाद

May 04, 2026 14:28 IST

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी को बड़ी बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भाजपा 193 सीटों पर आगे चल रही है जबकि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस 92 सीटों पर ही बढ़त बना सकी है। इन रुझानों से पहली बार राज्य में भाजपा सरकार बनने की संभावना जताई जा रही है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। वह अपने गढ़ माने जाने वाले भवानीपुर सीट से पीछे चल रही हैं और हार की आशंका जताई जा रही है। इससे पहले वर्ष 2021 के चुनाव में वह नंदीग्राम सीट से हार चुकी थीं। इस बार उनका ‘बांग्ला कार्ड’ भी प्रभावी होता नहीं दिख रहा है।

इस चुनावी सफलता के पीछे भाजपा के कुछ ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने बिना ज्यादा प्रचार के संगठन को मजबूत किया। इनमें शुभेंदु अधिकारी और दिलीप घोष जैसे स्थानीय नेताओं की भूमिका अहम रही लेकिन अन्य राज्यों से आए पांच नेताओं को भी ‘साइलेंट हीरो’ माना जा रहा है।

इनमें मंगल पांडेय का नाम प्रमुख है जो राज्य प्रभारी रहे। साथ ही भूपेंद्र यादव जिन्हें कई राज्यों में चुनावी सफलता दिलाने का अनुभव है इस चुनाव के प्रभारी रहे और उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संगठन महामंत्री के रूप में सुनील बंसल भी लंबे समय तक बंगाल में सक्रिय रहे और संगठन को मजबूत किया।

इसके अलावा सह-प्रभारी बिप्लब कुमार देब ने भी अहम भूमिका निभाई। ये सभी नेता लगातार बंगाल में सक्रिय रहे और चुनावी रणनीति पर काम करते रहे। खास बात यह है कि इन सभी की रिपोर्टिंग सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को होती थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा को बंगाल में जीत मिलती है तो इसका श्रेय इन रणनीतिक नेताओं को भी जाएगा। इस सफलता से अमित शाह का राजनीतिक प्रभाव और मजबूत होने की संभावना है। साथ ही उनके करीबी माने जाने वाले भूपेंद्र यादव और सुनील बंसल की भूमिका भी और प्रभावशाली हो सकती है।

गौरतलब है कि चुनाव के दौरान अमित शाह लगातार बंगाल मे ही रहे। मतदान के बाद भी कोलकाता में भाजपा की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी जिसमें राज्य की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई थी। कुल मिलाकर बंगाल के ये रुझान राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं।

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