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1977 से हर चुनाव में इन सीटों का रुझान बताता है किस पार्टी की बनेगी सरकार

उत्तर बंगाल, नदिया और उत्तर 24 परगना की ये सीटें देती हैं चुनावी नतीजों के संकेत।

By शिखा सिंह

May 04, 2026 11:05 IST

कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना जारी रहने के बीच राज्य की राजनीति में एक बार फिर 37 ऐसी अहम सीटों पर ध्यान केंद्रित हो गया है जिन्हें लंबे समय से बेलवेदर यानी चुनावी रुझान बताने वाली सीटें माना जाता है। ये सीटें 1977 से लगभग हर चुनाव में उस दल के पक्ष में गई हैं जिसने अंततः राज्य की सत्ता हासिल की है।

पिछले विधानसभा चुनाव में भी यही रुझान देखने को मिला था। इन 37 सीटों में से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने 23 सीटें जीती थीं जबकि भारतीय जनता पार्टी को 14 सीटें मिली थीं। यह बंटवारा राज्य के व्यापक चुनावी परिणामों को भी दर्शाता है।

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर बंगाल और रानाघाट तथा सीमावर्ती इलाकों के कुछ हिस्सों में मजबूत प्रदर्शन किया जबकि तृणमूल कांग्रेस ने नदिया जिले के बड़े हिस्सों और उत्तर 24 परगना के शहरी क्षेत्रों में दबदबा बनाए रखा। यह क्षेत्रीय अंतर साफ दिखाई दिया लेकिन कुल मिलाकर इसका फायदा सत्तारूढ़ दल को मिला।

ये 37 सीटें उत्तर बंगाल, उत्तर दिनाजपुर, नदिया और उत्तर 24 परगना जिलों में फैली हुई हैं और 1977 से राज्य के व्यापक राजनीतिक मूड को प्रतिबिंबित करती रही हैं। आम तौर पर जो दल इन सीटों में बहुमत हासिल करता है वही राज्य में सरकार बनाता है।

इन प्रमुख 'बेलवेदर' सीटों में शामिल हैं: अलीपुरद्वार, कालचीनी (एसटी), दार्जिलिंग, बालुरघाट, तपन (एसटी), रायगंज, करंदीघी, इस्लामपुर, चोपड़ा, गोलपोखर, चकुलिया, करिमपुर, तेहट्टा, पलाशीपारा, कालीगंज, नकशीपारा, चापरा, कृष्णानगर उत्तर, नवद्वीप, कृष्णानगर दक्षिण, शांतिपुर, रानाघाट उत्तर पश्चिम, रानाघाट उत्तर पूर्व, रानाघाट दक्षिण (एससी), चाकदह, कल्याणी (एससी), हरिणघाटा (एससी), बगदा (एससी), बोंगांव उत्तर (एससी), बोंगांव दक्षिण (एससी), गाइघाटा (एससी), स्वरूपनगर (एससी), बदुरिया, हाबरा, अशोकनगर, आमडांगा और बीजपुर। ये सभी मिलकर राज्य की विविध राजनीतिक तस्वीर पेश करती हैं।

विधानसभा चुनाव 2021 में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर बंगाल क्षेत्र में अलीपुरद्वार, कालचीनी, दार्जिलिंग, बालुरघाट, तपन और रायगंज सीटें जीती थीं। वहीं, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने उत्तर दिनाजपुर क्षेत्र में करंदीघी, इस्लामपुर, चोपड़ा, गोलपोखर और चकुलिया सीटों पर जीत दर्ज की थी।

नदिया क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस ने पूरी तरह से दबदबा बनाते हुए करिमपुर, तेहट्टा, पलाशीपारा, कालीगंज, नकशीपारा, चापरा, कृष्णानगर उत्तर, नवद्वीप, कृष्णानगर दक्षिण और शांतिपुर सीटों पर क्लीन स्वीप किया।

रानाघाट–कल्याणी क्षेत्र में मिश्रित परिणाम देखने को मिले। भारतीय जनता पार्टी ने रानाघाट उत्तर पश्चिम, रानाघाट उत्तर पूर्व, रानाघाट दक्षिण और हरिणघाटा सीटें जीतीं जबकि तृणमूल कांग्रेस ने चाकदह और कल्याणी सीटें अपने पास बरकरार रखीं।

उत्तर 24 परगना के मतुआ और सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी ने बगदा, बोंगांव उत्तर, बोंगांव दक्षिण और गाइघाटा सीटों पर जीत हासिल की, जबकि स्वरूपनगर सीट तृणमूल कांग्रेस के खाते में गई। शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस ने बदुरिया, हाबरा, अशोकनगर और आमडांगा में बढ़त बनाए रखी, जबकि बीजपुर सीट भारतीय जनता पार्टी ने जीती।

कुल मिलाकर इन 37 सीटों में से तृणमूल कांग्रेस ने 23 और भारतीय जनता पार्टी ने 14 सीटें जीतीं जो राज्य के समग्र चुनावी परिणामों के अनुरूप था।

एक बार फिर उत्तर बंगाल और सीमावर्ती इलाकों में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन मजबूत रहा जबकि नदिया और उत्तर 24 परगना के शहरी क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस ने अपना प्रभाव बनाए रखा। यह क्षेत्रीय विभाजन स्पष्ट था लेकिन अंततः सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाने वाला साबित हुआ।

मतगणना जारी रहने के साथ राजनीतिक विश्लेषकों की नजर एक बार फिर इन सीटों पर टिकी हुई है। इन क्षेत्रों में शुरुआती रुझान और बदलाव पूरे राज्य के चुनावी परिणाम की दिशा के संकेत देने वाले माने जा रहे हैं।

हालांकि चुनावों में अप्रत्याशित परिणाम संभव होते हैं लेकिन इन 37 सीटों की ऐतिहासिक स्थिरता इन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल बनाती है। 2026 में यह रुझान कायम रहेगा या बदल जाएगा यह अंतिम नतीजों के साथ साफ होगा लेकिन फिलहाल ये सीटें राज्य की सबसे अहम चुनावी रणभूमि बनी हुई हैं।

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