पिछले साल नवंबर की शुरुआत में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की शुरुआत से लेकर आज, सोमवार (4 मई 2026) को विधानसभा चुनाव की मतगणना तक - इस बार चुनाव की तैयारी में करीब 6 माह से भी अधिक का समय लग गया है। कई संघर्षों, विवादों, आरोप-प्रत्यारोप और कानूनी लड़ाइयों के बावजूद, कुल मिलाकर बंगाल ने अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण और हिंसामुक्त मतदान देखा।
पिछले छह महीनों में कई अभूतपूर्व कदम भी उठाए गए जो संभवतः इससे पहले विधानसभा चुनाव में कभी नहीं देखे गए।
आज चुनाव परिणाम सामने आने वाले हैं। सत्ता में परिवर्तन होगा या फिर से सत्ता में वापसी : इस बार की लड़ाई इसी बात को लेकर है।
आइए मतगणना की शुरुआत से पहले पिछले 6 महीने के पूरे घटनाक्रम पर डाल लेते हैं एक नजर :
- 2002 यानी करीब 24 सालों बाद बंगाल में ‘SIR’ किया गया। इसमें मतदाताओं के घर-घर जाकर उनकी मौजूदगी की पुष्टि की गई और मतदाता सूची का गहन संशोधन किया गया।
- ‘SIR’ के काम में रिकॉर्ड संख्या में (1 लाख से अधिक) बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) नियुक्त किए गए। उनकी ड्यूटी ‘SIR’ खत्म होने के बाद भी जारी रही और मतदान केंद्रों तक जारी रही।
- 2002 में ‘SIR’ प्रक्रिया पूरी करने में लगभग दो साल लगे थे, लेकिन इस बार यह काम महज 6 महीनों के अंदर पूरा करके चुनाव भी संपन्न हो चुका है। चुनाव आयोग का दावा है कि ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज जमा करने और ऐप-आधारित कई उपायों के कारण यह काम इतनी तेजी से संभव हुआ। हालांकि इस प्रक्रिया को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से कई सवाल भी उठाए गए हैं।
- 2002 के ‘SIR’ में बंगाल से करीब 28 लाख लोगों के नाम हटे थे। इस बार ड्राफ्ट लिस्ट, फाइनल लिस्ट और एडज्यूडिकेशन को मिलाकर लगभग 90 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए।
- बंगाल के अलावा बिहार सहित देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ‘SIR’ प्रक्रिया के दौरान कहीं भी जज या अपीलेट ट्रिब्यूनल की नियुक्ति नहीं की गयी।
- ‘SIR’ के दौरान आशंका, दबाव और काम के बोझ को लेकर 200 से अधिक मौतों पर तीखी राजनीतिक खींचतान भी चली।
- ‘SIR’ की प्रक्रिया अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। एडज्यूडिकेशन में हटाए गए करीब 27 लाख मतदाताओं का अंतिम फैसला अभी लंबित है।
- 1977 में बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में हुए थे, जब राज्य में वाम मोर्चा सत्ता में आया था। इसके बाद इस साल फिर से दो चरणों में चुनाव हुआ। 2001 में चुनाव एक चरण में हुए थे, जबकि बीच के वर्षों में चरणों की संख्या बढ़ती गई।
- 15 मार्च को चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद से मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी से लेकर ओसी-आईसी-एसआई-बीडीओ तक - कुल 300 से अधिक तबादले किए गए जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
- रिकॉर्ड संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती हुई - पहले चरण में 2407 और दूसरे चरण में 2321 कंपनियां।
- 294 सीटों पर निगरानी के लिए जनरल, पुलिस और एक्सपेंडिचर ऑब्जर्वर मिलाकर 100 से अधिक पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए - यह भी एक रिकॉर्ड है।
- 29 अप्रैल तक दूसरे चरण के मतदान के दौरान बिना दस्तावेज के नकद, शराब, ड्रग्स और सोना-गहनों सहित कुल 510 करोड़ रुपये की जब्ती हुई - यह भी एक रिकॉर्ड है।
- स्वतंत्रता के बाद बंगाल में सबसे अधिक मतदान 2011 में (84.72%) हुआ था, जब 34 साल की वाम सरकार हटी थी। इस बार यह रिकॉर्ड भी टूट गया और दो चरणों में कुल मतदान 92.5% से अधिक रहा।
- 2021 के चुनाव में हिंसा में कम से कम 24 लोगों की मौत हुई थी, 6000 से अधिक घायल हुए थे और कम से कम 60 बमबाजी की घटनाएं हुई थीं। इस बार अभी तक चुनावी हिंसा में कोई मौत नहीं हुई।
- मतदान और मतगणना ड्यूटी में लगे सरकारी कर्मचारियों, पुलिस और केंद्रीय बलों के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए - लापरवाही पर गिरफ्तारी से लेकर नौकरी खत्म करने तक की चेतावनी दी गई।
- दो चरणों में 80 हजार से अधिक बूथों के अंदर-बाहर कैमरे और वेबकास्टिंग की व्यवस्था - यह भी पहली बार हुआ।
- मतगणना के लिए कुल 432 ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए - यह भी एक रिकॉर्ड है।
- आज फलता सीट का परिणाम घोषित नहीं होगा। ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप के कारण वहां के सभी बूथों पर 21 मई को पुनर्मतदान होगा - हाल के समय में यह एक अभूतपूर्व घटना है।
- चुनाव परिणाम के बाद हिंसा रोकने के लिए अगले कम से कम दो महीनों तक 500 कंपनियां केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रहेगी।