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दो फूलों की न झुकने वाली लड़ाई: दो महीने लंबे प्रचार में कौन रहा आगे?

प्रचार के मैदान में घासफूल और कमल दोनों खेमों ने बराबरी की टक्कर दी

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की राजनीति में दो प्रमुख दलों के बीच इस तरह की जबरदस्त और अडिग टक्कर आखिरी बार कब देखने को मिली थी, यह कई लोगों को याद नहीं है। चुनावी मैदान में एक इंच भी पीछे न हटने के संकल्प के साथ ‘घासफूल’ (तृणमूल कांग्रेस) और ‘पद्मफूल’ यानी कमल (भारतीय जनता पार्टी) दोनों ही खेमों ने बराबरी की ताकत से प्रचार अभियान चलाया। दोनों पक्षों के नेताओं के बीच जोश और आत्मविश्वास का स्तर इस बात से समझा जा सकता है कि उनका संदेश साफ था-“हमें फूल समझने की भूल मत करना, हम आग हैं।” पूरे राज्य में सभाएं, रैलियां, रोड शो, नुक्कड़ सभाएं और सोशल मीडिया अभियान-हर मोर्चे पर दोनों दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी।

फाइल फोटो Ei Samay
तृणमूल कांग्रेस के प्रचार का आंकड़ा

तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी के कथित दुष्प्रचार का जवाब देने और अपने विकास कार्यों को सामने लाने के लिए पार्टी ने 300 से अधिक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कीं। इसके अलावा राज्य भर में अनेक सभाएं, रोड शो, जुलूस और जनसंपर्क कार्यक्रम किए गए। विपक्षी दलों के बयानों की तीखी आलोचना करते हुए तृणमूल ने अपने पक्ष को मजबूती से रखा।

इस प्रचार अभियान का नेतृत्व मुख्य रूप से पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी ने संभाला। ममता बनर्जी ने स्वयं 100 से अधिक जनसभाएं और 15 से ज्यादा जुलूस किए। अपने निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में उन्होंने अभूतपूर्व रूप से कई सभाएं, रैलियां और संगठनात्मक बैठकें कीं। दूसरी ओर, अभिषेक बनर्जी ने लगातार 36 दिनों तक प्रचार करते हुए कई सभाएं और रोड शो किए। कुल मिलाकर दोनों नेताओं ने मिलकर 200 से अधिक सभाएं और रोड शो किए।

राष्ट्रीय और केंद्रीय मुद्दों पर कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गईं, जबकि स्थानीय मुद्दों के लिए कोलकाता के साथ-साथ संबंधित क्षेत्रों में भी संवाद किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बयानों का जवाब देने के लिए भी यही रणनीति अपनाई गई।

तृणमूल ने प्रत्येक जिले में ‘मीडिया सेल’ या प्रचार कक्ष स्थापित किया, जहां रोजाना पार्टी के प्रवक्ता या वरिष्ठ नेता उपस्थित होकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते रहे।

फाइल फोटो Ei Samay
भारतीय जनता पार्टी के प्रचार का विवरण

भारतीय जनता पार्टी के प्रचार अभियान का मुख्य चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह रहे। इसके अलावा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, कई राज्यों के मुख्यमंत्री और अनेक केंद्रीय मंत्री भी प्रचार में सक्रिय रहे। कुल मिलाकर 640 राष्ट्रीय स्तर के नेता पश्चिम बंगाल में प्रचार के लिए पहुंचे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जनसभाएं कीं और 2 रोड शो में हिस्सा लिया। वहीं अमित शाह ने 29 जनसभाएं और 11 रोड शो किए।

भाजपा ने अपने प्रचार कार्यक्रमों के तहत ‘परिवर्तन यात्रा’ के समापन के बाद 14 तारीख को ब्रिगेड मैदान में एक बड़ी रैली आयोजित की। इसके बाद ‘तृणमूल के खिलाफ चार्जशीट’ नाम से अभियान चलाया गया, जो 15 जनवरी से 27 फरवरी तक चला। इस दौरान 220 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में यह चार्जशीट पेश की गई और लगभग 150 नेताओं ने इसमें भाग लिया। पार्टी ने 80 से अधिक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कीं।

जनभावनाओं से जुड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिलिगुड़ी में एक विवाह समारोह में भाग लिया, झाड़ग्राम में झालमुड़ी खाई, कोलकाता में नौकाविहार किया और ठनठनिया कालीबाड़ी में पूजा-अर्चना भी की।

अब लंबे प्रचार अभियान के बाद परीक्षा का दौर समाप्त हो चुका है और सभी की नजर परिणामों पर टिकी है। दोनों दलों के नेता, कार्यकर्ता और समर्थक अब मतगणना के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।

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