कोलकाताः बंगाल चुनाव के नतीजों से पहले राजस्थान के मशहूर फलोदी सट्टा बाजार ने अपनी नई भविष्यवाणियों से सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। पहले जहां सट्टा बाजार में टीएमसी की जीत का भाव मजबूत था, वहीं अब दूसरे चरण की वोटिंग और रिकॉर्ड मतदान के बाद बाजी पलटती नजर आ रही है। जानिए बीजेपी और टीएमसी में से सट्टा बाजार इस समय किस पर दांव लगा रहा है और क्या ममता बनर्जी अपनी कुर्सी बचा पाएंगी ?
पश्चिम बंगाल की सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी, इसका औपचारिक फैसला तो कल 4 मई को मतगणना के बाद होगा, लेकिन उससे पहले सट्टा बाजार के आंकड़ों ने एक बड़ा और चौंकाने वाला ‘खेला’ शुरू कर दिया है। कल नतीजे आएंगे, लेकिन लोग अब केवल चुनावी रैलियों या एग्जिट पोल पर ही नहीं, बल्कि राजस्थान के ऐतिहासिक फलोदी सट्टा बाजार की हलचल पर भी नजर टिकाए हुए हैं। रविवार को फलोदी सट्टा बाजार ने अपनी ताजा गणना में ऐसा मोड़ लिया है, जिसने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और बीजेपी दोनों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। टीएमसी खेमे में जहां थोड़ी निराशा हो सकती है तो वहीं बीजेपी के खेमे में नई जान आ सकती है।
शुरुआत में दीदी, अब ‘दादा’ ?
चुनाव की शुरुआत में फलोदी सट्टा बाजार टीएमसी की जीत को लेकर काफी आश्वस्त दिख रहा था। तब सट्टा बाजार में टीएमसी को 158-161 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था, जबकि बीजेपी को 127-130 सीटों पर ही सिमटता दिखाया जा रहा था। लेकिन 29 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान और राज्य में हुए 92.47% के रिकॉर्ड तोड़ मतदान ने सट्टा बाजार के सारे समीकरण बदल कर रख दिए हैं।
सट्टा बाजार का नया गणित: बीजेपी 150 पार!
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फलोदी सट्टा बाजार अब बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने की संभावना जता रहा है।
नए भावों के अनुसार:
बीजेपी: सट्टा बाजार अब बीजेपी को 150-152 सीटें दे रहा है, जो 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के 148 के आंकड़े से ज्यादा है।
टीएमसी: ममता बनर्जी की पार्टी अब 137-140 सीटों के बीच पिछड़ती नजर आ रही है।
भवानीपुर में ‘दीदी’ का भाव बढ़ा, खतरे के संकेत
सट्टा बाजार के सिस्टम में जिसका ‘भाव’ जितना ज्यादा होता है, उसे उतना ही कमजोर माना जाता है। भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की स्थिति को लेकर भी सट्टा बाजार ने बड़ा संकेत दिया है। वहां ममता बनर्जी का भाव 20-25 पैसे से बढ़कर 50 पैसे तक पहुंच गया है, जो उनकी अपनी सीट पर भी कड़े मुकाबले और कमजोरी की ओर इशारा कर रहा है।
क्यों बदला सट्टा बाजार का रुख ?
सट्टा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि भारी मतदान अक्सर ‘सत्ता विरोधी लहर’ का प्रतीक होता है. इसके अलावा, भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, केंद्रीय कर्मचारियों से मतगणना कराने के अदालती फैसले और बीजेपी का आक्रामक ध्रुवीकरण अभियान वे कारक हैं, जिन्होंने सट्टा बाजार के दांव को पलट दिया है।
सिर्फ फलोदी ही नहीं, मुंबई-दिल्ली भी सक्रिय
दिलचस्प बात यह है कि केवल फलोदी ही नहीं, बल्कि मुंबई और दिल्ली के सट्टा बाजारों में भी खींचतान मची हुई है। जहां मुंबई का बाजार बीजेपी को लेकर थोड़ा ज्यादा सकारात्मक है, वहीं दिल्ली के सट्टा बाजार में अभी भी टीएमसी की पकड़ बताई जा रही है। हालांकि, फलोदी की विश्वसनीयता सट्टा जगत में सबसे ज्यादा मानी जाती है।
सट्टा बाजार के ये आंकड़े भले ही चौंकाने वाले हों, लेकिन ये अंतिम परिणाम नहीं हैं। फलोदी सट्टा बाजार ने पूर्व में कई बार सटीक भविष्यवाणियां की हैं, तो कभी-कभी वह पूरी तरह गलत भी साबित हुआ है। अब सवाल यह है कि क्या सट्टा बाजार का यह ‘उलटफेर’ कल यानी 4 मई को हकीकत में बदलेगा ? क्या बंगाल की जनता ने सच में ‘कमल’ खिलाने का मन बना लिया है या ‘दीदी’ एक बार फिर सट्टा बाजार के दांव को चित कर देंगी ?