फ्लोरियाना द्वीप : 226 साल बाद फ्लोरियाना द्वीप पर विशेष प्रजाति की कछुआ का पुनरागमन, जेनेटिक्स की मदद से जीवविज्ञानियों ने लौटाए158 कछुए जीवविज्ञानी बता रहे हैं कि इक्वाडोर के फ्लोरियाना द्वीप से 1800 के आस-पास केलोनाइडिस नाइजर नाइजर प्रजाति का कछुआ विलुप्त हो गया था।
सोचिए, अगर ये कछुए बोल सकते तो शायद पागला दासु जैसी आवाज में कहते, “वह फिर लौट आया।” 200 वर्षों से अधिक समय तक ‘खो जाने’ के बाद किसी प्रजाति का अपने प्राकृतिक आवास में लौटना सच में आश्चर्यजनक होता है और जीवविज्ञानी इसे सामान्य बात मानते हैं। इसी द्वीप पर 226 साल बाद हाल ही में 158 कछुओं को लौटाया गया। यह असंभव सा काम संभव हुआ जेनेटिक्स की मदद से।
जीवविज्ञानी बताते हैं कि यह विशेष प्रयास ‘फ्लोरियाना इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट’ की शुरुआत के रूप में किया गया है। इस परियोजना का संचालन गैलापागोस नेशनल पार्क निदेशालय, गैलापागोस बायोसिक्योरिटी एंड क्वारंटाइन एजेंसी और चार्ल्स डार्विन फाउंडेशन समेत कई संस्थाएँ कर रही हैं।
बताया गया है कि ये कछुए वास्तव में ‘फ्लोरियाना दैत्याकार कछुए’ के वंशज हैं। भले ही ये कछुए किसी अन्य द्वीप पर चले गए हों, उनके वंश का अस्तित्व समाप्त नहीं हुआ। किसी अन्य द्वीप पर कछुओं की एक अलग प्रजाति में इनके जेनेटिक निशान मौजूद थे। वर्षों तक डीएनए परीक्षण और नियंत्रित प्रजनन के जरिए वैज्ञानिक अंततः ऐसे कछुए तैयार करने में सफल हुए जो मूल प्रजाति के बहुत करीब हैं। यही ‘तैयार किए गए’ कछुए अब फ्लोरियाना में वापस लाए गए हैं।
कछुए घास खाते हैं, पेड़ों को हिलाकर रास्ता बनाते हैं और अपनी मल के जरिए दूर-दूर तक बीज फैलाकर वनस्पतियों को नया जीवन देते हैं। इसलिए इन्हें ‘प्राकृतिक माली’ कहा जाता है। फ्लोरियाना में भी कई पीढ़ियों तक कछुए यही काम करते रहे।
लेकिन सवाल उठता है, ‘दैत्याकार कछुए’ ने फ्लोरियाना से अपना रिश्ता क्यों तोड़ दिया और द्वीप छोड़ दिया? पर्यावरणविद मानते हैं कि 18वीं और 19वीं सदी में नाविक, जलदस्यु और बस्ती बसाने वाले लोग इस द्वीप पर नियमित रूप से आने लगे। उन्होंने कछुओं का बड़े पैमाने पर शिकार शुरू कर दिया। इसके अलावा, बकरियों, चूहों और बिल्लियों जैसी विदेशी प्रजातियाँ द्वीप में फैल गईं और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करने लगीं। अस्तित्व के संकट में कछुए द्वीप छोड़ने लगे।
वहीं अब जेनेटिक्स के जरिए उस अतीत के अध्याय को उलटने में सफलता मिली है। फ्लोरियाना द्वीप से कई दूर इसाबेला द्वीप के वुल्फ वोल्कैनो क्षेत्र में एक प्रकार के कछुए पाए गए। 2008 में एक टीम ने इस प्रजाति के कछुओं के डीएनए की तुलना संग्रहालय में रखे फ्लोरियाना के कछुओं के नमूनों से की और आश्चर्यचकित रह गए। ऐसा माना जा रहा है कि नाविक जीवित कछुओं को एक द्वीप से दूसरे द्वीप ले जाते समय शायद कुछ कछुओं को छोड़ देते थे या वे नाविकों के हाथ से बच निकलते थे। संभवतः यहीं से संकर कछुए बने जिनके शरीर में पुराने डीएनए के निशान रहे। ‘बैकक्रॉसिंग’ की प्रक्रिया से नियंत्रित प्रजनन करके खोई हुई प्रजाति की अधिकांश विशेषताएँ धीरे-धीरे लौटाई गईं।