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ईरान तनाव के बीच 10 महीने की तैनाती के बाद अमेरिका लौट रहा है दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत

अभी भी क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी युद्धपोत, तनाव पूरी तरह खत्म होने पर सवाल कायम


अमेरिका : विमानवाहक युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड अब पश्चिम एशिया से अपनी तैनाती समाप्त कर संयुक्त राज्य अमेरिका वापस लौट रहा है। यह वही युद्धपोत है जिसने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाई थी और पिछले लगभग 10 महीनों से समुद्री क्षेत्र में तैनात था। जानकारी के अनुसार ईरान के साथ सैन्य तनाव शुरू होने के बाद यह युद्धपोत अमेरिकी सेंट्रल कमांड के नियंत्रण वाले क्षेत्र में तैनात था। अब इसे यूरोपीय कमांड के अधिकार क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया है जिसके बाद इसके अमेरिका वापसी की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

अमेरिकी प्रशासन के एक सूत्र के हवाले से बताया गया है कि इस बड़े युद्धपोत को पश्चिम एशिया से हटाने के पीछे संभावित रूप से कूटनीतिक कारण हो सकते हैं। माना जा रहा है कि ईरान के साथ जारी तनाव में कमी और संभावित शांति वार्ता के संकेतों के बीच यह निर्णय लिया गया है। साथ ही यह भी चर्चा है कि वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प फिलहाल क्षेत्रीय संघर्ष को और आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया था कि ईरान के साथ संघर्ष अब अस्थायी रूप से शांत हो गया है और 7 अप्रैल के बाद से दोनों देशों के बीच किसी प्रकार की गोलीबारी नहीं हुई है। हालांकि इस घटनाक्रम पर दूसरी राय भी सामने आ रही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यूएसएस जेराल्ड फोर्ड को केवल लंबे समय तक समुद्री तैनाती के कारण वापस बुलाया जा रहा है और इसका अर्थ यह नहीं है कि पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव समाप्त हो गया है। उनके अनुसार क्षेत्र में अभी भी अन्य अमेरिकी युद्धपोत जैसे यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस जॉर्ज डब्ल्यू. बुश तैनात हैं।

यह युद्धपोत वर्ष 2022 में वर्जीनिया स्थित नौसेना अड्डे से पहली बार समुद्र में उतरा था। इसके बाद इसने अटलांटिक महासागर में नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) के स्ट्राइक कॉर्प्स के हिस्से के रूप में कार्य किया। बाद में इसे वेनेज़ुएला में अमेरिकी सैन्य अभियानों में भी इस्तेमाल किया गया। फरवरी में इसे फारस की खाड़ी की ओर भेजा गया था जहाँ यह 28 फरवरी से शुरू हुए “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” में शामिल रहा। तैनाती के दौरान इस युद्धपोत पर आग लगने की घटना भी सामने आई थी। सूत्रों के अनुसार उसी समय से इसे पश्चिम एशिया से हटाने की योजना पर विचार किया जा रहा था।

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