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पश्चिम एशिया तनाव का असर: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग ठप, वैश्विक व्यापार पर खतरा

होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट, समुद्री यातायात 90% से अधिक गिरा

By प्रियंका महतो

May 01, 2026 18:26 IST


लंदन : होर्मुज जलडमरूमध्य में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच समुद्री यातायात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा आकलनों के अनुसार इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में 90 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है और अब प्रतिदिन 10 से भी कम जहाज इस मार्ग से गुजर रहे हैं।

यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) के अनुसार 1 मार्च से 27 अप्रैल के बीच क्षेत्र में 40 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई है जिनमें जहाजों पर हमले, क्षति, उत्पीड़न और लगभग टकराव जैसी स्थितियां शामिल हैं। इन घटनाओं में कम से कम 26 मामले सीधे व्यापारिक जहाजों पर हमलों से जुड़े पाए गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ जहाजों को ड्रोन हमलों के दौरान छर्रों से नुकसान हुआ जबकि कई जहाजों को धमकाया गया या उन्हें वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा। यह स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब अमेरिका और इसराइल द्वारा किए गए सैन्य हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया।

घटनाओं से पहले इस जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लगभग 130 जहाज गुजरते थे लेकिन अब यह संख्या घटकर 10 से भी कम रह गई है। इसके चलते यह मार्ग जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, लगभग ठप हो गया है।

यूकेएमटीओ अधिकारियों के अनुसार, इस स्थिति के कारण लगभग 850 से 870 बड़े व्यापारी जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और सुरक्षा जोखिमों के कारण सुरक्षित रूप से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। कमांडर जो ब्लैक ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता समुद्री कर्मियों की सुरक्षा है क्योंकि लगभग 20,000 नाविक ऐसे जहाजों पर फंसे हैं जो आगे बढ़ नहीं पा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि चालक दल के बदलाव और आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर दबाव पड़ रहा है जिससे नाविकों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।

यूकेएमटीओ जो रॉयल नेवी के सहयोग से संचालित एक समुद्री सुरक्षा निगरानी केंद्र है ने कहा कि वह रेड सी, खाड़ी क्षेत्र और उत्तरी हिंद महासागर में जहाजों की सुरक्षा के लिए लगातार चेतावनियां और वास्तविक समय की सलाह जारी कर रहा है। यह संस्था पहले सोमालिया में समुद्री डकैती और हाल के रेड सी संकट के दौरान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी है।

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो वैश्विक व्यापार मार्गों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है और सोमालिया तट पर समुद्री डकैती जैसी गतिविधियों में भी वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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