बीजिंग : बीजिंग स्थित चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने भारत के तीर्थयात्रियों के लिए पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा के पुनः शुरू होने की घोषणा का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि इस वर्ष चीन भारत के 1,000 तीर्थयात्रियों की यात्रा को सुविधाजनक बनाएगा।
यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि वे वर्ष 2026 में तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की तीर्थयात्रा के पुनः शुरू होने का स्वागत करती हैं। उन्होंने लिखा कि यह यात्रा दोनों देशों की महान सभ्यताओं के बीच आस्था, मित्रता और जन-से-जन संबंधों का एक मजबूत सेतु बनेगी।
इससे पहले विदेश मंत्रालय ने 30 अप्रैल को जारी बयान में कहा था कि कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का आयोजन जून से अगस्त के बीच किया जाएगा। यह यात्रा मंत्रालय द्वारा चीन सरकार के सहयोग से आयोजित की जाती है। मंत्रालय के अनुसार इस वर्ष 10-10 जत्थों में यात्रियों को भेजने की योजना है जिनमें प्रत्येक जत्थे में 50 यात्री शामिल होंगे।
यात्रा दो मार्गों से संचालित होगी—पहला मार्ग लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) से होकर जाएगा और दूसरा मार्ग नाथू ला दर्रा (सिक्किम) से होकर। यात्रियों का चयन पूरी तरह कंप्यूटर आधारित, निष्पक्ष, यादृच्छिक और लिंग-संतुलित प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रणाली kmy.gov.in शुरू कर दी गई है। इच्छुक यात्री इस पोर्टल पर पंजीकरण करके आवेदन कर सकते हैं और किसी भी प्रकार के पत्र या फैक्स भेजने की आवश्यकता नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, आवेदन की अंतिम तिथि 19 मई 2026 निर्धारित की गई है। चयन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी और उम्मीदवारों को वेबसाइट के माध्यम से ही सभी जानकारी प्राप्त होगी।
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म में अत्यंत धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है। यह यात्रा हर वर्ष सैकड़ों श्रद्धालुओं द्वारा की जाती है, क्योंकि इसे भगवान शिव के निवास स्थान के रूप में विशेष आस्था से देखा जाता है।