वाशिंगटनः अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ताजा घटनाक्रम में डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान की ओर से भेजे गए नए प्रस्ताव पर असंतोष जताया है, जिससे दोनों देशों के बीच संभावित समझौते पर अनिश्चितता गहरा गई है।
जानकारी के मुताबिक, तेहरान ने शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के माध्यम से एक संशोधित प्रस्ताव अमेरिका तक पहुंचाया। हालांकि, व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि यह प्रस्ताव उनकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता।
उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत तो करना चाहता है, लेकिन उसके कदम निर्णायक नहीं हैं। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के भीतर नेतृत्व स्तर पर मतभेद किसी स्थायी समाधान की राह में बाधा बन सकते हैं।
तनाव की जड़ क्या है?
दोनों देशों के बीच तनाव की पृष्ठभूमि हालिया सैन्य गतिविधियों से जुड़ी है। 28 फरवरी को अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया था, जिसमें इजरायल ने भी साथ दिया। इसके बाद भले ही संघर्षविराम लागू हुआ हो, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं।
तनाव कम करने के प्रयास में इस्लामाबाद में बातचीत आयोजित की गई, लेकिन दोनों पक्षों की सख्त शर्तों के कारण यह पहल सफल नहीं हो सकी। दूसरी बैठक भी रद्द करनी पड़ी।
होर्मुज और परमाणु कार्यक्रम बना विवाद का केंद्र
ईरान ने संकेत दिया था कि यदि परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों को अलग रखा जाए, तो वह बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन अमेरिका ने इस शर्त को अस्वीकार कर दिया।
ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि होर्मुज क्षेत्र में दबाव बनाए रखा जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान अमेरिकी शर्तों को नहीं मानता, तो सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती असहमति यह संकेत दे रही है कि कूटनीतिक समाधान फिलहाल दूर है। प्रस्तावों के आदान-प्रदान के बावजूद भरोसे की कमी और सख्त रुख ने क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।