नई दिल्ली/ओडिशाः ओडिशा के केओंझर जिले में सामने आए एक बेहद दर्दनाक मामले ने देशभर में बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक आदिवासी व्यक्ति को अपनी बहन के अस्थि-अवशेष (कंकाल) को बैंक ले जाते हुए दिखाया गया, ताकि वह उसके खाते से ₹20,000 की राशि निकाल सके। इस घटना ने बैंकिंग प्रणाली और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
AAP नेता संजय सिंह का तीखा हमला
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता संजय सिंह ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए ओडिशा की भाजपा सरकार की कल्याणकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच एक आदिवासी भाई को अपनी बहन के कंकाल के साथ बैंक जाना पड़ा, यह बेहद शर्मनाक है।
संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्होंने अपने वेतन से उस व्यक्ति को ₹50,000 की आर्थिक सहायता भेजी है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मदद नहीं, बल्कि एक मानवीय जिम्मेदारी है।
प्रशासन का पक्ष: प्रक्रिया की जानकारी की कमी
इस मामले पर प्रशासन ने अलग दृष्टिकोण पेश किया है। केओंझर के सब-कलेक्टर उमाशंकर दलई ने कहा कि संबंधित व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं थी, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।
उन्होंने बताया कि वह व्यक्ति अपनी बहन का कानूनी वारिस नहीं है, इसलिए बैंक ने आवश्यक दस्तावेज मांगे थे, जो वह प्रस्तुत नहीं कर सका। प्रशासन ने यह भी कहा कि मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस प्रमाण पत्र की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, ताकि धनराशि सही वारिस को दी जा सके।
बैंक का स्पष्टीकरण
इंडियन ओवरसीज बैंक ने भी इस मामले पर स्पष्टीकरण जारी किया है। बैंक ने कहा कि उनके कर्मचारियों ने कभी भी किसी मृत व्यक्ति की उपस्थिति की मांग नहीं की थी। बैंक का कहना है कि सभी कार्रवाई नियमों और प्रक्रिया के अनुसार की गई। प्रशासन ने बताया कि पीड़ित परिवार के लिए रेड क्रॉस सहायता के तहत ₹20,000 की प्रक्रिया तेज की जा रही है। साथ ही कानूनी दस्तावेज तैयार करने और बैंक में जमा राशि के निपटान की प्रक्रिया को भी तेज किया जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन अब गांव में पेयजल समस्या सहित अन्य मुद्दों के समाधान की दिशा में भी काम कर रहा है।