पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे कल सोमवार (4 मई 2026) को घोषित किए जाएंगे, जिससे यह साफ हो जाएगा कि क्या तृणमूल कांग्रेस (TMC) सत्ता में वापसी करेगी या भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य में अपनी पहली जीत दर्ज करेगी। हालांकि, राज्य की कुल 294 सीटों में से कल केवल 293 सीटों के भाग्य का ही फैसला होगा।
दक्षिण 24 परगना जिले की फलता (Falta) विधानसभा सीट पर गंभीर चुनावी अनियमितताओं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन के आरोपों के कारण फिलहाल परिणाम घोषित नहीं किए जाएंगे।
फलता में दोबारा मतदान का निर्णय
निर्वाचन आयोग ने शनिवार को फलता विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया है। यह मतदान 21 मई को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित किया जाएगा ताकि एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके। इस विशेष सीट के लिए मतों की गिनती 24 मई को होगी। गौरतलब है कि इससे पहले शनिवार को ही पश्चिम मगराहाट और डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्रों के 15 बूथों पर भी पुनर्मतदान संपन्न हुआ है।
क्यों लिया गया पुनर्मतदान का फैसला ?
29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान फालटा में कई गंभीर घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद चुनाव पर्यवेक्षकों ने मतदाता डराने-धमकाने, बूथों के भीतर अनधिकृत व्यक्तियों की मौजूदगी और ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की रिपोर्ट सौंपी।
EVM पर टेप का विवाद
भाजपा उम्मीदवार देवांशु पांडा ने आरोप लगाया कि बूथ नंबर 177 पर भाजपा के चुनाव चिह्न वाले बटन को टेप से ढक दिया गया था। बाद में अमित मालवीय ने भी वीडियो साझा कर दावा किया कि बूथ नंबर 144 और 189 में भी पार्टी के चिह्न पर सफेद टेप लगाया गया था।
हिंसक झड़प और लाठीचार्ज
फलता के बेलसिंग इलाके में मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश के आरोपों के बाद सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया। इस घटना में कई महिलाओं और एक बच्चे के घायल होने की खबर सामने आई। कुल 77 बूथों पर पुनर्मतदान की मांग की गई थी, जिनमें से 32 शिकायतें अकेले फलता से थीं।
मचा राजनीतिक घमासान
फलता में मुख्य मुकाबला TMC के जहांगीर खान, BJP के देवांशु पांडा, कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मुल्ला और CPI(M) के शंभु नाथ कुर्मी के बीच है। इस सीट को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे स्थानीय टीएमसी नेतृत्व के अत्याचार के खिलाफ महिलाओं की जीत बताया।
अभिषेक बनर्जी की चुनौती
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दिल्ली के नेताओं को चुनौती दी कि वे खुद आकर फलता से चुनाव लड़ें। बहरहाल, निर्वाचन आयोग ने अब 21 मई के मतदान के लिए केंद्रीय बलों की भारी तैनाती, माइक्रो-ऑब्जर्वर और वेबकास्टिंग जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी प्रकार की धांधली दोबारा न हो सके। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जाएगी।