कोलकाताः दक्षिण 24 परगना जिले के फलता विधानसभा क्षेत्र में चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग कड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। विवादित 60 बूथों पर तैनात अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। इन बूथों के प्रथम, द्वितीय, तृतीय मतदान अधिकारी, प्रीसाइडिंग अधिकारी, रिटर्निंग अधिकारी और पर्यवेक्षकों सहित कुल 242 अधिकारियों के विरुद्ध रिपोर्ट तैयार कर आयोग को भेजी गई है। यह रिपोर्ट जिला निर्वाचन अधिकारी और विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता द्वारा प्रस्तुत की गई है।
29 अप्रैल को हुए दूसरे चरण के मतदान के दौरान आरोप लगा कि फलता के कई बूथों पर ईवीएम में भाजपा के चुनाव चिन्ह के ऊपर टेप चिपका दिया गया था। इस मुद्दे ने उस समय तूल पकड़ लिया जब भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा किया (जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई)। इसके बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया और अगले दिन कई जगहों पर मतदान से वंचित किए जाने के विरोध में सड़क जाम की घटनाएं भी सामने आईं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने पूरे फलता विधानसभा क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया है। अब 21 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक पुनर्मतदान होगा, जबकि मतगणना 24 मई को की जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आयोग को सौंपी गई रिपोर्ट में कर्तव्य में लापरवाही, शिकायतों की अनदेखी और समय पर कार्रवाई न करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। बताया गया है कि संबंधित बूथों पर ईवीएम पर टेप लगाए जाने की बात रिटर्निंग अधिकारी ने स्वीकार की थी लेकिन इसके बावजूद तत्काल कोई कदम नहीं उठाया गया, जिससे सवाल खड़े हो गए।
सूत्रों के मुताबिक जब यह मामला मुख्य निर्वाचन अधिकारी के संज्ञान में आया, तब तक मतदान प्रतिशत 38% था, जो कार्रवाई में देरी के कारण बढ़कर 62% तक पहुंच गया। इस देरी को लेकर जांच की जा रही है कि मतदान प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोका क्यों नहीं गया।
इस बीच चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें सचिव स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं, कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में बैठकर वेबकास्टिंग फुटेज की जांच कर रहे हैं। बूथवार वीडियो की बारीकी से समीक्षा की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहां और किस प्रकार की गड़बड़ी हुई।
विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने अनुशासनहीनता के आरोपों पर कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है। संकेत मिल रहे हैं कि कई अधिकारियों को निलंबित किया जा सकता है और कुछ के खिलाफ नौकरी से संबंधित कड़े निर्णय भी लिए जा सकते हैं।
फलता प्रकरण को लेकर अब राजनीतिक हलकों में भी काफी हलचल है और सभी की नजर चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।