नई दिल्लीः देश में एक अहम राजनीतिक क्षण सामने है क्योंकि वर्ष 2026 के विधानसभा चुनावों में चार राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और एक केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में मतगणना 4 मई को होने वाली है। कई हफ्तों तक चले तीव्र चुनाव प्रचार, रिकॉर्ड मतदान और तीखे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बाद अब जनता का फैसला ईवीएम मशीनों में सुरक्षित है, जिनकी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच निगरानी की जा रही है। मतगणना से ठीक पहले का माहौल बेहद गर्म और राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा। विभिन्न दलों के नेताओं ने अपनी-अपनी जीत के दावे किए और संभावित परिणामों को लेकर बयानबाजी तेज कर दी।
पश्चिम बंगाल इस बार सबसे ज्यादा चर्चित और मुकाबले वाला राज्य रहा। माहौल आखिरी समय तक तनावपूर्ण बना रहा। भाजपा नेता सुभेंदु अधिकारी ने मतगणना से पहले धार्मिक भावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने लक्ष्मी नारायण मंदिर में पूजा की और उन्हें विश्वास है कि सनातन धर्म के हितों की रक्षा करने वाली सरकार बनेगी। भाजपा नेताओं ने राज्य में बदलाव की लहर होने का दावा भी किया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पूरी मजबूती के साथ वापसी का भरोसा जताया। पार्टी ने दावा किया कि ममता बनर्जी 200 से अधिक सीटों के साथ फिर सत्ता में लौटेंगी। साथ ही पार्टी के नेताओं ने मतगणना एजेंटों के लिए भोजन और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। पार्टी ने स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए, हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित हैं।
तनाव तब और बढ़ गया जब चुनाव आयोग ने फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 बूथों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया। आयोग ने इसे गंभीर चुनावी गड़बड़ियों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप का मामला बताया। इस फैसले पर टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने जवाबदेही की मांग की, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे विपक्ष की प्रतिक्रिया बताया। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद पुनर्मतदान होना चिंताजनक है।
कोलकाता में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रही, जहां सीआरपीएफ अधिकारियों ने नेताजी इंडोर स्टेडियम स्थित स्ट्रॉन्ग रूम का निरीक्षण किया। भाजपा कार्यकर्ता भी मतगणना केंद्रों के बाहर जमा हुए और उन्होंने ईवीएम की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही।
तमिलनाडु में राजनीतिक स्थिति अपेक्षाकृत स्पष्ट मानी जा रही है लेकिन मुकाबला उतना ही तीखा है। सत्तारूढ़ डीएमके गठबंधन के फिर से सत्ता में आने की संभावना जताई जा रही है। वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने भरोसा जताया कि डीएमके गठबंधन पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगा और पार्टी में किसी भी प्रकार के मतभेद से इनकार किया।
राज्य में मतगणना की तैयारियां काफी व्यवस्थित तरीके से की गई हैं। रानीपेट जिले में अरिग्नर अन्ना गवर्नमेंट विमेंस आर्ट्स कॉलेज में ईवीएम को विधानसभा क्षेत्रवार व्यवस्थित किया गया। चुनाव आयोग ने तीन-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली लागू की है और पहली बार क्यूआर कोड आधारित पहचान व्यवस्था शुरू की है, जिससे केवल अधिकृत लोगों को ही संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश मिल सके।
असम में भाजपा पहले से सत्ता में है। पार्टी अपने कामकाज के आधार पर दोबारा जीत की उम्मीद कर रही है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने असम और पुडुचेरी में भाजपा की जीत का भरोसा जताया। दूसरी ओर विपक्ष भी आशावादी है। विधायक अमीनुल इस्लाम ने कहा कि जनता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मतदान किया है और कांग्रेस को समर्थन मिलेगा।
असम में महिलाओं की मतदान में भागीदारी पुरुषों से अधिक रही, जो परिणामों को प्रभावित कर सकती है। हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार ने चुनाव को स्थिरता और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दों पर केंद्रित किया, जबकि कांग्रेस ने शासन और भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमुख मुद्दा बनाया।
केरल में मुकाबला अलग तरह का है, जहां वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) लगातार दूसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रहा है। राज्य में परंपरागत रूप से सत्ता परिवर्तन होता रहा है लेकिन इस बार मतदाताओं का रुझान कुछ अलग संकेत दे रहा है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने शांतिपूर्ण मतदान की सराहना की, जबकि विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
पुडुचेरी में भी मुकाबला दिलचस्प है। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस-डीएमके गठबंधन वापसी के प्रयास में है। यहां भी मतदाता बड़ी संख्या में मतदान करने पहुंचे, जो राजनीतिक जागरूकता का संकेत है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने विश्वास जताया कि जनता सत्तारूढ़ सरकारों के खिलाफ निर्णायक जनादेश देगी। वहीं, केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता का दावा करते हुए कहा कि पार्टी का प्रभाव पूरे देश में तेजी से फैल रहा है।
इस चुनावी प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता व्यापक जनभागीदारी, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी सुधार रहे हैं, जैसे लाइव वेबकास्टिंग और क्यूआर कोड आधारित प्रवेश प्रणाली। हालांकि लगातार उठते आरोप-प्रत्यारोप यह भी दिखाते हैं कि संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर बहस जारी है।
अब सबकी नजर मतगणना पर है। क्या मौजूदा सरकारें अपनी पकड़ बनाए रखेंगी या मतदाता बदलाव का संदेश देंगे? पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी फिर से मजबूत वापसी करेंगी या भाजपा नया इतिहास रचेगी? तमिलनाडु में डीएमके अपनी सत्ता बचा पाएगी? असम में भाजपा दोबारा विश्वास हासिल करेगी या कांग्रेस वापसी करेगी? और केरल व पुडुचेरी में क्या नई राजनीतिक दिशा उभरेगी?
इन सभी सवालों के जवाब मतगणना के साथ धीरे-धीरे सामने आएंगे और यह परिणाम न केवल राज्यों की सरकारें तय करेंगे, बल्कि आने वाले समय की राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करेंगे।