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अमेरिका का बड़ा सैन्य फैसला: जर्मनी से 5,000 सैनिकों की वापसी शुरू

ब्रिगेड कॉम्बैट टीम और मिसाइल यूनिट हटाई जाएगी, फिर भी 30 हजार से अधिक सैनिक रहेंगे तैनात

वासिंगटन : अमेरिका ने जर्मनी में तैनात अपने लगभग पाँच हजार सैनिकों को वापस बुलाने का निर्णय लिया है। यह प्रक्रिया अगले छह से बारह महीनों के भीतर पूरी की जाएगी। इस फैसले की जानकारी शुक्रवार को पेंटागन यानी अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से दी गई। पेंटागन के अनुसार यूरोप में अपनी सैन्य मौजूदगी की व्यापक समीक्षा के बाद यह कदम उठाया गया है। इस पुनर्मूल्यांकन के आधार पर ही जर्मनी से बड़ी संख्या में सैनिकों की वापसी तय की गई है।

हालाँकि अमेरिकी समाचार माध्यमों—जैसे न्यू यॉर्क टाइम्स और द गार्जियन—के हवाले से यह भी सामने आया है कि इस निर्णय के पीछे जर्मनी की हालिया राजनीतिक टिप्पणियों की अहम भूमिका रही है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने ईरान से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि अमेरिका के पास कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है और ईरान के मामले में उसे ‘अपमान’ का सामना करना पड़ा है।

इन टिप्पणियों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर लिखा कि जर्मनी को अपने देश की समस्याओं और रूस-यूक्रेन युद्ध पर अधिक ध्यान देना चाहिए। एक वरिष्ठ पेंटागन अधिकारी ने न्यू यॉर्क टाइम्स को बताया कि ईरान मुद्दे पर जर्मनी से समर्थन न मिलना और उसकी सार्वजनिक आलोचना वॉशिंगटन के लिए नाराज़गी का कारण बनी है। इस फैसले के तहत जर्मनी में तैनात एक ब्रिगेड कॉम्बैट टीम को पूरी तरह हटाया जाएगा। साथ ही एक लंबी दूरी की मिसाइल यूनिट की तैनाती भी अब नहीं की जाएगी।

इसके बावजूद जर्मनी में तीस हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक मौजूद रहेंगे। जापान के बाद जर्मनी अब भी अमेरिकी सैन्य तैनाती का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र है। यूरोप, अफ्रीका और पश्चिम एशिया में अमेरिकी अभियानों के लिए यह बेस बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्पेन और इटली से भी सैनिकों की वापसी की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल सैन्य रणनीति नहीं है बल्कि इसका स्पष्ट कूटनीतिक संदेश भी है। उनके अनुसार यह निर्णय इस बात का संकेत देता है कि अमेरिका ईरान मुद्दे पर अपने सहयोगी देशों के रुख को लेकर सख्त रुख अपना रहा है।

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