नई दिल्ली/ कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की मतगणना शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने राज्य में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भी “कमल खिलेगा” और पार्टी को सकारात्मक नतीजे मिलेंगे।
एएनआई से बातचीत में शहज़ाद पूनावाला ने कहा कि आज सभी की निगाहें पश्चिम बंगाल पर टिकी हुई हैं। उन्होंने कहा कि हालात साफ होंगे, स्थिति बदलेगी और राज्य में भाजपा को समर्थन मिलेगा।
उन्होंने राज्य की मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले पंद्रह वर्षों में ममता बनर्जी के नेतृत्व में शासन से जनता में असंतोष बढ़ा है और लोग बदलाव के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार मतदाताओं ने इस बार सरकार बदलने का मन बना लिया है।
पश्चिम बंगाल के साथ-साथ शहज़ाद पूनावाला ने अन्य राज्यों में भी भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के बेहतर प्रदर्शन का दावा किया। उन्होंने कहा कि असम में पार्टी अपने कामकाज के आधार पर लगातार तीसरी बार सरकार बनाएगी। साथ ही केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी एनडीए के पक्ष में मजबूत जनादेश मिलने की बात कही।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन राज्यों में चुनाव हुए हैं, वहां भाजपा और उसके सहयोगी दलों को व्यापक समर्थन मिलेगा और कई जगहों पर स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनने की संभावना है।
इस बीच, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 2026 के विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है। सुबह 8 बजे पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू हुई, जिसके बाद 8:30 बजे से ईवीएम के वोटों की गिनती की जा रही है। हर चरण के नतीजे ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म और चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर रीयल-टाइम में अपडेट हो रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच कड़ा मुकाबला दिखाया गया है। कुछ सर्वेक्षणों-जैसे चाणक्य स्ट्रेटेजीज और मैट्राइज ने भाजपा को बढ़त दी है, जबकि अन्य अनुमानों में टीएमसी को भी अच्छी संख्या में सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। छोटे दलों की भूमिका सीमित रहने का अनुमान है। तमिलनाडु में राजनीतिक तस्वीर अपेक्षाकृत स्पष्ट मानी जा रही है, जहां सत्तारूढ़ डीएमके गठबंधन के फिर से सत्ता में आने की संभावना व्यक्त की जा रही है, जिसे मजबूत मतदान और अनुकूल एग्जिट पोल का समर्थन मिला है।
असम में, जहां भाजपा पहले से सत्ता में है, पार्टी अपने शासन के रिकॉर्ड के आधार पर दोबारा जनादेश हासिल करने की उम्मीद कर रही है। यहां मतदान प्रतिशत काफी ऊंचा रहा और महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक रही, जो अंतिम परिणामों को प्रभावित कर सकती है। हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार ने चुनाव को स्थिरता और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दों से जोड़ा, जबकि कांग्रेस ने शासन और कथित भ्रष्टाचार को प्रमुख मुद्दा बनाया।
केरल में मुकाबला अलग प्रकृति का है, जहां सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) लगातार दूसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रहा है। परंपरागत रूप से यहां सत्ता परिवर्तन होता रहा है, लेकिन इस बार मतदाताओं के रुझान में बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
पुडुचेरी में भी चुनावी मुकाबला अहम बना हुआ है। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है, जबकि कांग्रेस-डीएमके गठबंधन वापसी की कोशिश कर रहा है। यहां उच्च मतदान प्रतिशत ने मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाया है।
इसी बीच भाजपा ने अपने प्रदर्शन को लेकर व्यापक आत्मविश्वास व्यक्त किया है। केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने कहा कि देशभर में कमल का विस्तार हो रहा है और पार्टी का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जो चुनावी नतीजों में दिखाई देगा।