कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर दिखाया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की “स्ट्रीट फाइटर” छवि और लंबे चुनावी अभियान के बावजूद तृणमूल कांग्रेस (TMC) शुरुआती रुझानों में पिछड़ती नजर आ रही है। वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मजबूत बढ़त हासिल करते हुए सत्ता परिवर्तन के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। यह स्थिति 15 वर्षों से सत्ता में काबिज TMC के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका मानी जा रही है।
रुझानों में BJP की बढ़त, TMC पीछे
चुनाव आयोग के दोपहर तक के रुझानों के अनुसार BJP लगभग 198 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि TMC करीब 100 सीटों के आसपास सिमटती दिखाई दे रही है।
यदि ये रुझान अंतिम परिणाम में बदलते हैं, तो यह पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन का ऐतिहासिक संकेत होगा। ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक BJP की बढ़त ने पूरे राज्य के राजनीतिक समीकरण को बदल दिया है।
रिकॉर्ड मतदान और SIR विवाद से बदला माहौल
इस चुनाव में 92.47% का रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक बदलाव की बड़ी लहर और सत्ता-विरोधी भावना का संकेत मान रहे हैं। अधिक मतदान ने चुनावी परिणामों पर गहरा प्रभाव डाला है और मुकाबले को अधिक निर्णायक बना दिया है।
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी चुनाव से पहले विवाद सामने आया। TMC ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया उनके समर्थक वोट बैंक को प्रभावित करने के लिए की गई है, जबकि BJP ने इसे अवैध नामों को हटाने की प्रक्रिया बताया। इस विवाद ने चुनावी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण और ध्रुवीकृत कर दिया।
क्षेत्रीय बढ़त और TMC की चुनौतियां
ग्रामीण इलाकों, उत्तर बंगाल और जंगलमहल में BJP ने मजबूत पकड़ बनाई है, जबकि कई पारंपरिक TMC गढ़ों में मुकाबला कड़ा रहा। शहरी क्षेत्रों में भी BJP ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है, जिससे उसकी बढ़त और मजबूत हुई है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस चुनाव में 90 से अधिक रैलियां और पदयात्राएं कीं, लेकिन शुरुआती रुझानों के अनुसार उनकी “स्ट्रीट फाइटर” छवि इस बार जनलहर को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं हो सकी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ता-विरोधी लहर, भ्रष्टाचार के आरोप और संगठनात्मक कमजोरियां TMC के प्रदर्शन पर भारी पड़ी हैं। फिलहाल मतगणना जारी है और अंतिम परिणाम ही तय करेंगे कि पश्चिम बंगाल की सत्ता किसके हाथ में जाएगी, लेकिन मौजूदा रुझान राज्य में बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर स्पष्ट संकेत दे रहे हैं।