नई दिल्ली : भारत के रक्षा क्षेत्र में यह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा सकता है। अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) विकास के क्षेत्र में भारत का नाम अब पूरे विश्व में चर्चा में है और इसकी सफलता के लिए जिम्मेदार है रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित अग्नि श्रृंखला की मिसाइलें जैसे ब्रह्मोस या पृथ्वी श्रृंखला कई देशों के लिए आकर्षण का केंद्र रही है जिनमें ब्राज़ील, फिलीपींस, मिस्र और वियतनाम शामिल हैं।
अब DRDO की नवीनतम मिसाइल, अग्नि-6 अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इसका पूर्ण परीक्षण शुरू किया जाएगा। DRDO के अध्यक्ष समीर वी. कामत ने ANI नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0' में शुक्रवार को यह जानकारी दी। इस मिसाइल के सक्रिय होने पर अमेरिका भी भारत की मिसाइल रेंज के दायरे में आ जाएगा।
अग्नि-6: क्षमता और खतरनाक विशेषताएँ
अग्नि-5 पहले से ही भारतीय सेना के पास है जिसकी रेंज 5,000 से 8,000 किलोमीटर है। इससे चीन, पाकिस्तान और पूरे एशिया के कई हिस्सों के साथ-साथ यूरोप का भी एक बड़ा हिस्सा भारत की मिसाइल हमले की क्षमता में शामिल था। अग्नि-6 भारतीय मिसाइल शक्ति को और कई गुना बढ़ा देगा। यह एक चार-स्तरीय ICBM है जिसकी रेंज 10,000 से 12,000 किलोमीटर है। इसका मतलब यह है कि यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के कुछ हिस्से अलास्का से लेकर कॉन्टिनेंटल यूएस तक इस मिसाइल की पहुँच में होंगे।
इस मिसाइल में MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक है जिससे एक मिसाइल में 10-11 परमाणु वारहेड्स ले जाने की क्षमता है। इसके अलावा, यह मैक 24 की गति से, यानी लगभग 29,400 किलोमीटर प्रति घंटे, यात्रा कर सकती है, और थाड या रूस के S-500 जैसे अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को भी चकमा दे सकती है।
दीर्घकालीन तैयारी और रणनीति
अग्नि-5की सफलता के बाद 2012-13 में ही DRDO ने अग्नि-6 के डिजाइन और प्रारंभिक कार्य की योजना बनाई थी। 2013 में तत्कालीन DRDO प्रमुख वी. के. सारस्वत ने इसकी घोषणा की थी। इसके बाद लगभग एक दशक तक अत्यंत गोपनीयता के साथ काम चलता रहा।
DRDO के सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में इसके हर हिस्से और कंपोनेंट का अलग-अलग परीक्षण किया गया है। पूर्ण परीक्षण न होने के बावजूद डिज़ाइन और लैब स्तर पर सभी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। अब केवल पूरी तरह से इंटीग्रेशन और सरकार के नीतिगत निर्णय की प्रतीक्षा है।
क्या अमेरिका के साथ युद्ध की संभावना है?
भारत ने ऐसी मिसाइल विकसित की है जो अमेरिका तक पहुँच सकती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अमेरिका के साथ युद्ध संभव है। भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच युद्ध की कोई संभावना नहीं है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध मजबूत हैं। हालाँकि कूटनीति में डिटेरेंस या प्रतिरोध क्षमता का महत्वपूर्ण योगदान है। भू-राजनीतिक हालात कभी भी बदल सकते हैं। उदाहरण के लिए, 1971 के भारत-बांग्लादेश युद्ध के समय अमेरिका ने भारतीय दबाव को कम करने के लिए बंगाल की खाड़ी में अपने परमाणु चालित 'सेवन्थ फ्लिट' को तैनात किया था जब भारत के पास अमेरिका को सीधे चुनौती देने का कोई साधन नहीं था।