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दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: अब्दुल रशीद शेख को एम्स ले जाकर पिता से मिलने की अनुमति

तिहाड़ जेल से दिनभर एम्स में रहने और शाम को वापसी का निर्देश।

By शिखा सिंह

May 05, 2026 14:29 IST

नई दिल्ली : बारामूला से सांसद अब्दुल रशीद शेख को उनके बीमार पिता से मिलने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय ने अनुमति प्रदान की है। अदालत ने आदेश दिया है कि उन्हें तिहाड़ जेल से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ले जाया जाए और शाम को वापस तिहाड़ जेल लाया जाए।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की खंडपीठ ने पहले दिए गए अंतरिम जमानत आदेश में संशोधन की अनुमति दी। इस संशोधित आदेश के तहत अब्दुल रशीद शेख को उनके पिता से मिलने के लिए राहत दी गई है जो वर्तमान में दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती हैं।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि दिन के समय वे सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक अपने पिता के साथ एम्स में रहेंगे। इसके अलावा उन्हें अंतरिम जमानत अवधि के दौरान मोबाइल फोन उपयोग करने की भी अनुमति दी गई है।

अब्दुल रशीद शेख जिन्हें इंजीनियर राशिद के नाम से भी जाना जाता है ने अपने पिता की गंभीर बीमारी को देखते हुए अंतरिम जमानत आदेश में संशोधन की मांग की थी। उनके पिता को बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर से दिल्ली एम्स में एयरलिफ्ट किया गया है।

उच्च न्यायालय ने उनकी अंतरिम जमानत को 10 मई तक बढ़ा दिया है। इससे पहले उन्हें श्रीनगर अस्पताल में अपने पिता से मिलने के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भी नोटिस जारी किया था जिसमें अब्दुल रशीद शेख की उस याचिका पर विचार किया गया था जिसमें उन्होंने अपने पिता के साथ रहने के लिए अंतरिम जमानत आदेश में संशोधन की मांग की थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत में दलील दी थी कि अब्दुल रशीद शेख के पिता की हालत गंभीर हो गई थी और उन्हें 2 अप्रैल को एयरलिफ्ट कर दिल्ली लाया गया जहां वे अब एम्स में भर्ती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आदेश के कारण अब्दुल रशीद शेख श्रीनगर में ही सीमित हैं और अन्य स्थानों पर जाने की अनुमति नहीं है।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह भी कहा कि वे दिल्ली में अपने आधिकारिक आवास पर रह सकते हैं। इस पर अधिवक्ता अक्षय मलिक ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें तिहाड़ जेल से सीधे एम्स ले जाया जा सकता है।

पीठ ने टिप्पणी की कि अंतरिम जमानत को 2-3 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है।

अधिवक्ता विख्यात ओबेरॉय ने दिल्ली उच्च न्यायालय में इस मामले का उल्लेख करते हुए आदेश में संशोधन की मांग की थी। उन्होंने कहा कि पहले अब्दुल रशीद शेख को श्रीनगर अस्पताल में भर्ती अपने पिता से मिलने के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी लेकिन अब उनके पिता को बेहतर इलाज के लिए एम्स दिल्ली स्थानांतरित किया गया है।

उन्होंने तात्कालिक आवेदन दाखिल कर आदेश में संशोधन की मांग की थी जिसे न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

28 अप्रैल को खंडपीठ ने अब्दुल रशीद शेख को एक लाख रुपये के मुचलके और समान राशि के एक जमानतदार पर अंतरिम जमानत दी थी।

अंतरिम जमानत देते समय उच्च न्यायालय ने शर्तें लगाई थीं कि वे अपने पिता के अस्पताल में ही रहेंगे परिवार के अलावा किसी अन्य व्यक्ति से बातचीत नहीं करेंगे और मोबाइल फोन चालू रखेंगे। उन्हें दो अधिकारियों के साथ रहने की अनुमति दी गई थी जिनका खर्च राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा वहन किया जाएगा। उन्हें एक सप्ताह बाद आत्मसमर्पण करना था।

उच्च न्यायालय ने यह भी नोट किया था कि अब्दुल रशीद शेख एक सांसद हैं। उन्हें पहले नामांकन दाखिल करने और चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी साथ ही संसद सत्र में भाग लेने के लिए कस्टडी पैरोल भी प्रदान किया गया था।

अधिवक्ता अक्षय मलिक के साथ ख्वार सलीम ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से पक्ष रखा। एनआईए ने आशंका जताई थी कि यदि उन्हें अंतरिम जमानत दी जाती है तो गवाह प्रभावित हो सकते हैं और बताया कि एक गवाह पहले ही पक्षद्रोही हो चुका है।

एनआईए ने यह भी कहा था कि उन्हें कस्टडी पैरोल देने पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन खंडपीठ ने इस दलील और प्रार्थना को खारिज कर दिया था।

निचली अदालत ने पहले ही उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

वे एनआईए द्वारा दर्ज आतंक वित्तपोषण मामले में हिरासत में हैं और उन्हें 19 अगस्त 2019 को गिरफ्तार किया गया था।

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