कर्नाटक : देश में जैसे-जैसे विमानों की संख्या बढ़ रही है वैसे-वैसे हवाईअड्डों के भीतर वाहन भी बढ़ रहे हैं। एयरसाइड वह क्षेत्र है जहाँ विमान खड़े रहते हैं और वहां कई प्रकार के वाहन घूमते हैं — यात्री बस, सामान ले जाने वाली ट्रॉली, विमान की सीढ़ी खींचने वाले ट्रैक्टर, एयरलाइंस और हवाईअड्डे के अधिकारियों के वाहन, ईंधन भरने वाले टैंकर और कैटरिंग वैन। इन वाहनों की संख्या बढ़ने से उनके आपसी टकराने की संभावना भी बढ़ जाती है और कभी-कभी विमान के साथ भी टक्कर लग सकती है। विशेषकर रात में और धुंध के समय यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है।इसी समस्या को देखते हुए निजी संगठन बियाल (बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी) ने एयरसाइड पर वाहनों की गतिविधियों की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल का निर्णय लिया है। बेंगलुरु हवाईअड्डे में जल्द ही यह प्रणाली लागू की जाएगी।
पिछले महीने ही कोलकाता हवाईअड्डे पर एक घटना घटी थी जब इंडिगो की खड़ी विमान के पास एक कैटरिंग वैन जा लगी और एयरबस 320 विमान को नुकसान हुआ। ऐसा बताया गया है कि इस तरह की घटनाएँ बार-बार होती रही हैं। हवाईअड्डे के सूत्रों के अनुसार विमान को पार्क करने और रनवे से गुजरने के लिए विशेष रास्ता टैक्सीवे होता है। इसी तरह अन्य वाहनों के लिए अलग लेन होती है। नियम के अनुसार एयरसाइड पर किसी भी वाहन की गति 20 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक नहीं हो सकती। कभी-कभी वाहनों को विमान के टैक्सीवे को क्रॉस करना पड़ता है और टकराव से बचने के लिए उनके लिए विशेष नियम निर्धारित हैं।
हवाईअड्डे के एक अधिकारी ने बताया जिन वाहनों को जरूरत पड़ने पर रनवे या उसके आसपास जाना होता है उनमें रेस्पॉन्डर लगे होते हैं। एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) की मॉनिटरिंग में उनके गति की जानकारी विमान की तरह दर्ज होती है। यदि वाहन और विमान पास आ जाते है तो एटीसी तुरंत सतर्क कर सकता है। लेकिन एयरसाइड के बाकी वाहनों के पास यह सुविधा नहीं है।
इस स्थिति को सुधारने के लिए बियाल ने मंगलवार को बताया कि वे ‘इंटीग्रेटेड स्मार्ट एयरसाइड सेफ्टी सिस्टम’ लॉन्च कर रहे हैं। एआई संचालित इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य विमान और वाहनों के क्रॉस-रोड की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इससे विमान और वाहन दोनों की गतिविधियों में बेहतर समन्वय होगा। फिलहाल यह समन्वय मुख्य रूप से ड्राइवरों की सतर्कता पर निर्भर करता है जिसे अब तकनीक आधारित बनाया जा रहा है।
जब विमान उड़ान भरता है तो यदि उसके पास कोई वस्तु आती है तो पायलट को सिग्नल मिलता है। इसे एयरक्राफ्ट कोलिज़न अवॉइडिंग सिस्टम (एसीएएस) कहते हैं। सिग्नल मिलने पर पायलट विमान को सुरक्षित स्थान पर ले जाते हैं। हालांकि यह सिस्टम हवाईअड्डे के टैक्सीइंग समय में काम नहीं करता। सवाल यह उठता है कि क्या एयरसाइड पर घूमने वाले वाहनों में भी एसीएएस जैसी तकनीक लगाई जाएगी।