नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण नकदी की कमी का सामना कर रहे व्यवसायों को अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराने हेतु आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0 को स्वीकृति दे दी। इस पहल के माध्यम से कुल 2,55,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त ऋण प्रवाह सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 5,000 करोड़ रुपये विमानन क्षेत्र के लिए निर्धारित हैं।
इस योजना के तहत राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) सदस्य ऋण संस्थानों को अतिरिक्त ऋण सुविधा में डिफॉल्ट की स्थिति में एमएसएमई के लिए 100 प्रतिशत तथा गैर-एमएसएमई और विमानन क्षेत्र के लिए 90 प्रतिशत तक की गारंटी प्रदान करेगी। मंत्रिमंडल के अनुसार, “इस योजना का उद्देश्य एमएसएमई को 100 प्रतिशत और गैर-एमएसएमई तथा एयरलाइन क्षेत्र को 90 प्रतिशत तक की क्रेडिट गारंटी उपलब्ध कराना है।”
यह सहायता उन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), गैर-एमएसएमई इकाइयों तथा निर्धारित यात्री एयरलाइनों को दी जाएगी, जिनके पास 31 मार्च 2026 तक बकाया ऋण सुविधाएं मौजूद हैं और जिनके खाते मानक श्रेणी में हैं। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, ऋण प्राप्ति को आसान बनाने के लिए गारंटी शुल्क शून्य रखा गया है।
एमएसएमई और गैर-एमएसएमई के लिए अतिरिक्त ऋण उनकी वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में उपयोग किए गए अधिकतम कार्यशील पूंजी के 20 प्रतिशत तक सीमित होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 100 करोड़ रुपये तय की गई है। वहीं एयरलाइन क्षेत्र के लिए यह सहायता 100 प्रतिशत तक हो सकती है, जिसमें प्रति उधारकर्ता अधिकतम सीमा 1,500 करोड़ रुपये रखी गई है और यह कुछ शर्तों के अधीन होगी।
ऋण की अवधि एमएसएमई और गैर-एमएसएमई के लिए 5 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसमें 1 वर्ष का मोरेटोरियम शामिल है। दूसरी ओर, विमानन क्षेत्र के लिए यह अवधि 7 वर्ष होगी, जिसमें 2 वर्ष का मोरेटोरियम दिया जाएगा। यह योजना 31 मार्च 2027 तक स्वीकृत सभी ऋणों पर लागू रहेगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह योजना पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण उत्पन्न अल्पकालिक नकदी असंतुलन से निपटने में व्यवसायों की मदद करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। साथ ही, यह कारोबारों को संचालन जारी रखने, रोजगार सुरक्षित रखने और आपूर्ति शृंखलाओं को बनाए रखने में सहायक होगी।
इस पहल से यह सुनिश्चित होने की उम्मीद है कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से एमएसएमई और विमानन क्षेत्र की अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरतें पूरी हो सकेंगी। मंत्रिमंडल ने यह भी उल्लेख किया कि समय पर नकदी उपलब्ध कराने से व्यवसाय टिके रहेंगे और रोजगार हानि को रोका जा सकेगा।
इसके अतिरिक्त यह कदम वर्तमान भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच घरेलू उत्पादन को बाधित हुए बिना जारी रखने और आर्थिक तंत्र की मजबूती बनाए रखने में भी योगदान देगा।